धरती और खुले आसमान ने दिया साथ – डॉo कमल केo प्यासा

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डॉo कमल केo प्यासा
प्रेषक : डॉ. कमल के . प्यासा

कस्बे में जैसे मातम छाया हुआ था चारों ओर खामोशी ही खामोशी थी। सभी दुकानें और कई एक संस्थान भी बंद दिख रहे थे।हैरानी तो इस बात की हो रही थी कि हर समय खुली रहने वाली शराब की दुकानें भी बंद पड़ी थीं। हां,बहुत से लोग एक ही ओर जाते दिखाई दे रहे थे।झिझकते झिझकते पूछने पर पता चला कि कस्बे के जाने माने रईस शराब व लोक निर्माण के ठेकेदार लाला चूहुँकू राम के यहां कोई बड़ा हादसा हुआ है और सभी लोग उधर का रुख किए हैं। ठेकेदार चूहुंकू राम के घर व बाहर की ओर लोगों की भरी भीड़ लगी थी।आने जाने वाले सभी लोग बड़े ही गमगीन अंदाज से ठेकेदारनी व चूहुंकू राम को अपनी अपनी संवेदना प्रकट करते हुवे (उनके एकमात्र वफादार पहरेदार टीटू कुत्तेको ,जो कि चीर निद्रा में सुन्दर मखमली आसन पर पड़ा था )उस पर रंग बिरंगे आवरण डाले जा रहे थे।

चारों ओर खामोशी ही खामोशी छाई थी ठेकेदारनी के तो आंसू अपने प्रिय बेटे टीटू की दुखद मृत्यु पर ,रोके नहीं रुक रहे थे।वह तो लगातार टीटू के कसीदे रो रो कर सुनाए जा रही थी “किथी चला गया लोको मेरा टीटू ?” ठेकेदारनी अपनी सुध बुध खोए न जाने क्या क्या बोले जा रही थी। उधर जब क्षेत्र के विधायक को इस हृदय विदारक हादसे की जानकारी मिली तो उससे भी नहीं रहा गया और वह भी तत्काल अपने संगी साथियों सहित ठेकेदार चूहुंकू के यहां अपनी दुःख भरी संवेदनाएं प्रकट करने पहुंच गया। क्षेत्र के विधायक को अपने पड़ोसी ठेकेदार के यहां पहुंचे देख रत्ना मोची (ठेकेदार का पड़ोसी) भी उनसे मिलने व ठेकेदार के यहां दुःख प्रकट करने हेतु जल्दी से तैयार हो कर भागते हुवे जल्दी जल्दी सीढियां उतरने लगता है और मुंह के बल गिर जाता है।उसके मुंह व सिर से खून बहने लगता है !

कुछ लोग रतने मोची को गिरते देख कर वहीं रुक जाते हैं,इतने में ही विधायक महोदय भी उधर से जाते हुवे ,वहां पर लोगों को खड़े देख पूछते हैं ” अरे भई क्यों रुक गए क्या बात है ?” “बेचारा जल्दी जल्दी सीढियां उतरते गिर गया है खून नहीं रुक रहा !” किसी दर्शक ने बीच से उत्तर देते हुवे विधायक महोदय को बताया। ” अरे भई हॉस्पिटल ले जाओ देखते क्या हो,पट्टी करवा दो।” विधायक महोदय उधर बिना रुके व देखा अनदेखा करते हुवे, रतने मोची को वहीं छोड़ चल दिए,पीछे पीछे सभी संगी साथी भी निकल गए। चूहुंकू ठेकेदार के वफादार कुत्ते टीटू की फूलों व रंग बिरंगे मखमली कपड़ों से सजी अर्थी लोगों की भारी भीड़ (धार्मिक त्योहार की शोभा यात्रा की भांति) गली बाजारों से निकल रही थी। राम नाम सत्य है के नारों के साथ ही साथ लोगों द्वारा ,” बेटा टीटू अमर रहे अमर रहे ” के नारे भी गूंज रहे थे।

कुछ लोग एक दूजे से फुसफुसाते हुवे कह रहे थे,” बड़ा ही वफादार था टीटू चूहुंकू और ठेकेदारनी तो इसे अपने बेटे की तरह ही प्यार करते थे।” “अरे भई सारे अंदर बाहर की देख भाल और रखवाली इसी पर तो निर्भर थी ठीक ही रो रहे हैं दोनों !” लोगों की उस भीड़ में से एक अन्य व्यक्ति बोले जा रहा था। पूरी विधि विधान के अनुसार टीटू का दाहा संस्कार हो गया था। उधर रतने मोची का शरीर अपने घर के सामने आंगन में खुले आसमान के नीचे अचेतन अवस्था से (लगातार रक्त के बह जाने से)चिरनिंद्रा का रूप ले चुका था। उसके अपने ही बहे खून से धरती लाल हो चुकी थी शायद लाल धरती उसकी प्राकृतिक अर्थी थी और खुला आसमान विशाल कफ़न ।

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Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

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