लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने 1.14 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ग्राम पंचायत कोट के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना सरकार की प्राथमिकता है। पुराने पंचायत भवनों का सुधार किया जा रहा है, जबकि नए भवन एकरूप डिजाइन और पैटर्न पर बनाकर क्षेत्रवासियों को एक ही छत के नीचे सभी पंचायत सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मंत्री ने बताया कि पंचायत भवन स्थानीय विकास की धुरी हैं, जहां से क्षेत्र की योजनाओं की रूपरेखा तैयार होती है और उनका क्रियान्वयन होता है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वाई.एस. परमार और वीरभद्र सिंह के प्रयासों का स्मरण करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से पंचायतों और महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि शिमला ग्रामीण क्षेत्र में पिछली भाजपा सरकार के दौरान बनी नई पंचायतों के भवन तैयार हो चुके हैं।
मंत्री ने फोरलेन निर्माण से प्रभावित ग्रामीणों के हितों की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने पौराणिक पेयजल स्रोतों, मकानों में आई दरारों, प्रभावित रास्तों के पुनर्निर्माण, बिजली-पानी व्यवस्था और किसानों की सिंचाई समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए।
विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि कोट पंचायत के लिए पिछले तीन वर्षों में 21 विकास कार्यों के लिए 24 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। चौरी घाटी-यान संपर्क सड़क को फोरलेन निर्माण से प्रभावित होने के बाद सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। शोघी से साधुपुल वाया कनेची ओहर सड़क नाबार्ड के तहत निर्मित की जाएगी। क्षेत्र की सिंचाई योजनाओं के लिए 5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
युवाओं के लिए ओपन जिम और शोघी में लाइब्रेरी का निर्माण किया जाएगा। शोघी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य भी जारी है, जिस पर अब 23 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
पंचायत प्रधान नेहा मेहता ने पिछले पांच सालों में क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों और कुछ समस्याओं की जानकारी दी। मंत्री ने उनके द्वारा रखी मांगों के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया और कोट पंचायत के विभिन्न विकास कार्यों के लिए 6 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की।
मंत्री ने पंचायत क्षेत्र में “सरकार गांव की ओर” कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों की मदद से अधिकतर का समाधान किया। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी समस्याओं और मांगों को निसंकोच सामने रखने का आग्रह किया, ताकि उनका शीघ्र निवारण सुनिश्चित किया जा सके।


