जिला शिमला में सड़क किनारे घूम रहे बेसहारा पशुओं को गौशालाओं तक पहुँचाने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष अभियान चलाया। प्रारंभिक सर्वेक्षण में जिले में 272 बेसहारा पशुओं की पहचान की गई थी, लेकिन अभियान के दौरान अब तक 472 पशुओं को सुरक्षित गौसदनों तक पहुँचाया जा चुका है।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि अभियान शुरू होते ही लोगों ने अपने पशुओं को छोड़ना शुरू कर दिया, जिससे एक महीने में करीब 200 नए बेसहारा पशु सड़क पर देखे गए। उनका कहना था कि जिला प्रशासन का लक्ष्य 1 जनवरी 2026 तक शिमला को बेसहारा पशु मुक्त जिला बनाना था।
उपायुक्त ने लोगों से अपील की कि पशुधन हमारी धरोहर है, इन्हें बेसहारा न छोड़ें। उन्होंने अनुरोध किया कि अगर कोई अपना पशु सड़क पर छोड़ता है, तो इसकी सूचना उपायुक्त कार्यालय को दें; सूचनाकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने यह भी चेताया कि सर्दियों में बेसहारा पशुओं की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
पशु पालन विभाग के अनुसार, बेसहारा पशुओं को जिले के विभिन्न क्षेत्रों से रेस्क्यू कर कई गौसदनों में पहुंचाया गया। शिमला शहर से 5 पशु सुन्नी और टुटू गौसदनों में भेजे गए। ठियोग क्षेत्र से 118 पशुओं को छैला, मतियाना, शिलारू, कोटखाई और कलबोग से रेस्क्यू कर बलघर, कृष्णा गौशाला मल्कू माजरा बददी और हांडा कुंडी कैटल सेंचुरी में छोड़ा गया। ज्यूरी क्षेत्र से 175 पशुओं को विभिन्न गौसदनों में, रोहड़ू क्षेत्र से 51 और चौपाल क्षेत्र से 123 बेसहारा पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।
उपायुक्त ने जोर देकर कहा कि जिला प्रशासन इस अभियान को लगातार जारी रखेगा और लोगों से सहयोग की अपील की।


