मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और कुपोषण की चुनौती से निपटने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 207.11 करोड़ रुपये की लागत से इंदिरा गांधी मातृ-शिशु संकल्प योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, आवश्यक कैलोरी तथा जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त पूरक पोषण उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेशभर में 2,99,488 पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
यह योजना जीवन के पहले 1,000 दिनों की अहम अवधि पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगी, ताकि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल रही कुपोषण की समस्या को समेकित पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और देखभाल के माध्यम से समाप्त किया जा सके। इसके साथ ही शिशु मृत्यु दर और बीमारियों में कमी लाने तथा समग्र पोषण स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा।
योजना के अंतर्गत गंभीर और मध्यम तीव्र कुपोषित बच्चों, कम जन्म वजन वाले शिशुओं और अन्य उच्च जोखिम समूहों की शीघ्र पहचान, नियमित निगरानी और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए सशक्त रेफरल और फॉलो-अप तंत्र विकसित किया जाएगा।
फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को एनीमिया, दस्त और निमोनिया जैसी प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। वैज्ञानिक रूप से तैयार, फोर्टिफाइड और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य प्रीमिक्स उपलब्ध कराए जाएंगे, जो भारत सरकार के संशोधित पोषण मानकों के अनुरूप होंगे। साथ ही, प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए दूध और अंडे भी वितरित किए जाएंगे।
गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों तथा कम जन्म वजन वाले शिशुओं के लिए विशेष पोषण और अनुवर्ती प्रोटोकॉल लागू होंगे। पोषण पुनर्वास केंद्रों को होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर और होम-बेस्ड यंग चाइल्ड केयर कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर विजिट्स के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। निगरानी प्रणाली को पोषण ट्रैकर, माता एवं शिशु सुरक्षा कार्ड तथा राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर संयुक्त समीक्षा तंत्र के माध्यम से मजबूत किया जाएगा।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जल शक्ति विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच संस्थागत समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि पोषण, स्वास्थ्य, जल-संरक्षण, स्वच्छता और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा सेवाओं की समेकित डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कुपोषण राज्य में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है और सरकार इसे समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वंचित वर्गों तक पौष्टिक आहार की पहुंच सुनिश्चित कर सामाजिक और आर्थिक बोझ को कम किया जा सकेगा तथा एक स्वस्थ और समृद्ध प्रदेश के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।



