रक्छम-छितकुल में भालू परिवार कैमरे में कैद

Date:

Share post:

रक्छम छितकुल वन्यजीव अभयारण्य में हिमालयी भूरे भालू की मौजूदगी का एक महत्वपूर्ण फोटोग्राफिक रिकॉर्ड सामने आया है। हाल ही में वन विभाग की टीम ने एक मादा हिमालयी भूरे भालू को उसके दो शावकों के साथ कैमरे में कैद किया, जिसे क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अभयारण्य क्षेत्र में पहले भी हिमालयी भूरे भालू देखे जाते रहे हैं, लेकिन पहली बार एक मादा भालू और उसके शावकों का स्पष्ट फोटोग्राफिक प्रमाण प्राप्त हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि शावकों की उपस्थिति इस क्षेत्र में प्रजाति के सुरक्षित प्रजनन और स्वस्थ आवास का संकेत है।

इस दुर्लभ दृश्य की पुष्टि फील्ड टीम — संतोष कुमार ठाकुर (BFO), छायानंद (FGD), अक्षय (FGD), पवन कुमार (FGD) और वन मित्र अल्पना नेगी — द्वारा की गई। उनके साथ प्रसिद्ध बर्ड वॉचर गैरी भट्टी तथा उनकी टीम के सदस्य डॉ. बिश्वरूप सतपति और डॉ. राहुल देब मंडल भी मौजूद थे, जिन्होंने सबसे पहले मादा भालू को देखा।

ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष ठाकुर ने बताया कि इस बार मिले फोटोग्राफिक प्रमाण ने रक्छम-छितकुल क्षेत्र के संरक्षण महत्व को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि यह इलाका हिमालयी भूरे भालू के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास के रूप में उभर रहा है।

हिमालयी भूरा भालू हिमालय क्षेत्र के सबसे बड़े स्तनधारियों में गिना जाता है। यह सर्वाहारी प्रजाति वनस्पतियों, जड़ों, कीटों और छोटे जीवों को भोजन के रूप में ग्रहण करती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रजाति ऊंचाई वाले पारिस्थितिक तंत्रों में बीजों के फैलाव के जरिए जैव विविधता संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रसिद्ध नेचुरलिस्ट गैरी भट्टी ने इस घटना को हिमाचल प्रदेश के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि लाहौल के बाद अब रक्छम-छितकुल क्षेत्र हिमालयी भूरे भालुओं को प्राकृतिक आवास में देखने के प्रमुख स्थलों में शामिल हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की वन्यजीव गतिविधियां क्षेत्र में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं पैदा कर सकती हैं, जिससे स्थानीय समुदायों को भी लाभ मिलेगा।

अशोक नेगी ने वन्यजीव रेंज सांगला की टीम को इस महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के लिए बधाई देते हुए बताया कि इससे पहले वर्ष 2016-17 में गोपाल नेगी द्वारा इस क्षेत्र से हिमालयी भूरे भालू का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। उन्होंने अग्रिम पंक्ति में कार्यरत वन अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की।

वन रक्षक छायानंद और पवन कुमार ने बताया कि बर्फ पिघलने के बाद हर वर्ष अभयारण्य क्षेत्र में हिमालयी भूरे भालू दिखाई देते हैं, लेकिन इस बार मादा भालू को दो शावकों के साथ देखना संरक्षण के दृष्टिकोण से बेहद उत्साहजनक है।

हालिया रिकॉर्ड ने एक बार फिर रक्छम-छितकुल क्षेत्र को हिमालयी वन्यजीवों के महत्वपूर्ण प्राकृतिक आश्रय स्थल के रूप में स्थापित किया है और इसकी जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता को और अधिक मजबूत किया है।

नर्स दिवस पर सेवा और समर्पण का संदेश

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

Related articles

ESMA Action Prevents Garbage Chaos in Shimla

In a decisive move to maintain public hygiene and civic order, District Magistrate Shimla Anupam Kashyap has imposed...

नर्स दिवस पर सेवा और समर्पण का संदेश

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान...

चुनाव का दंगल (कविता) – डॉ. कमल के. प्यासा

डॉ. कमल के. प्यासा - मंडी बज रहे है, बजने लगे हैं भोंपू चुनाव के इस दंगल में,,,,!   रंग बिरंगे परचम...

समर्पण दिवस पर बाबा हरदेव सिंह जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

संत निरंकारी मिशन द्वारा युगदृष्टा बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की पावन स्मृति में “समर्पण दिवस” श्रद्धा, भक्ति...