हिमाचल प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ की राज्य इकाई द्वारा 31 मई को गेयटी थिएटर के सम्मेलन कक्ष में एक भव्य साहित्यिक आयोजन का आयोजन किया गया, जिसमें ग़ज़लकार सुमित राज के ग़ज़ल संग्रह “घर बनाऊँ कि फिर किताब लिखूं” का औपचारिक लोकार्पण किया गया। समारोह के साथ मुशायरा और काव्य गोष्ठी ने साहित्य प्रेमियों को देर शाम तक बांधे रखा।
कार्यक्रम में पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और चंडीगढ़ सहित कई राज्यों से आए नामचीन साहित्यकारों, कवियों और ग़ज़लकारों की मौजूदगी ने माहौल को और भी समृद्ध बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार सुरेश सेठ ने की, जबकि मुख्य अतिथि शिक्षा सचिव राकेश कंवर रहे। विशिष्ट अतिथियों में अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव प्रो. सुखदेव सिंह सिरसा तथा पंजाब इकाई के अध्यक्ष सुरजीत सिंह जज सहित अनेक साहित्यिक हस्तियां शामिल रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के पारंपरिक स्वागत और सम्मान से हुआ, जिसके बाद ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने पुस्तक पर विस्तार से चर्चा की और सुमित राज की ग़ज़लों को संवेदनशीलता और समकालीन अनुभवों का सशक्त दस्तावेज बताया।
सुमित राज ने अपने लेखन सफर और रचनात्मक दृष्टि को साझा करते हुए अपनी साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री रोमिता शर्मा ने सधी हुई प्रस्तुति के साथ किया।
दोपहर के पश्चात दूसरे सत्र में माहौल पूरी तरह शायरी और कविता के रंग में रंग गया। मंच पर उपस्थित और अन्य आमंत्रित कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे आयोजन ने गेयटी की शाम को एक यादगार साहित्यिक उत्सव में बदल दिया, जहां शब्दों ने भावनाओं की नई दुनिया रच दी।



