नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला में आयोजित एक टीवी चैनल के कॉन्क्लेव में प्रदेश की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास प्रशासनिक अनुभव की कमी रही है और उनकी नीतियों व कार्यशैली के कारण हिमाचल प्रदेश विकास के मामले में दो दशक पीछे चला गया है। उनका आरोप था कि सरकार के भीतर समन्वय का अभाव है और कई मंत्री भी स्वयं को निर्णय प्रक्रिया से अलग महसूस कर रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस संगठन के अध्यक्ष रहते हुए भी मुख्यमंत्री एक विशेष गुट तक सीमित रहे और आज भी सरकार में कुछ चुनिंदा लोगों के बीच ही निर्णय लिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इससे मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की बात को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि इसी कारण मुख्यमंत्री की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगे हैं और भविष्य में कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति बन सकती है।
भाजपा में गुटबाजी के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह संगठित और एकजुट है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पिछली बार के मत प्रतिशत के मामूली अंतर को भी समाप्त कर स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के लिए भाजपा नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर की असंतुष्टि जिम्मेदार रही। उनके अनुसार, कई कांग्रेस नेता इसी कारण भाजपा में शामिल हुए हैं और अभी भी कुछ विधायक पार्टी के संपर्क में हैं।
प्रदेश सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि विकास कार्य लगभग ठप हो चुके हैं और दो हजार से अधिक सरकारी संस्थान बंद किए गए। उन्होंने कहा कि कई मामलों में जनप्रतिनिधियों के दबाव के बाद सरकार को अपने ही फैसले बदलने पड़े, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीरता पर प्रश्न उठते हैं।
उन्होंने पेखुवाला सोलर परियोजना का उल्लेख करते हुए उसमें अनियमितताओं के आरोप लगाए और कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
आपदा प्रबंधन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 की प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में अब भी कई स्थानों पर मलबा नहीं हटाया गया है। उनका दावा था कि प्रभावितों को मुख्य रूप से केंद्र सरकार से प्राप्त सहायता राशि ही वितरित की गई, जबकि राज्य सरकार द्वारा घोषित राहत पैकेज का अपेक्षित उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति ऐसी हो गई है कि कई विकास परियोजनाओं के लिए भी केंद्र पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर तथा 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के लक्ष्य पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए इसे वास्तविक परिस्थितियों से परे बताया।
आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान राज्य का ऋण नियंत्रित गति से बढ़ा था और ऋण भुगतान की स्थिति भी बेहतर थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने साढ़े तीन वर्षों में लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है, जिससे प्रदेश पर कुल ऋण का बोझ काफी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि जब विकास कार्यों की गति धीमी है, तब यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इतनी बड़ी राशि का उपयोग किन कार्यों में किया जा रहा है।
उन्होंने अपनी सरकार की जल जीवन मिशन, हिमकेयर, सहारा और शगुन जैसी योजनाओं तथा लगभग पाँच हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार को भी अपने विकास कार्यों का स्पष्ट लेखा-जोखा जनता के सामने रखना चाहिए।
रामपुर नगर परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष करण शर्मा, उपाध्यक्ष रोहित नेगी तथा भाजपा पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल ने कौल नेगी के साथ शिमला में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा और शिमला जिला भाजपा अध्यक्ष केशव चौहान भी उपस्थित रहे। बैठक में रामपुर नगर परिषद के विकास, जनहित के विभिन्न मुद्दों तथा क्षेत्र के समग्र विकास पर चर्चा हुई। जयराम ठाकुर ने सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
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