सुख-आश्रय योजना: शिमला के 257 बच्चों के जीवन में आया बदलाव

Date:

Share post:

माता-पिता का साया सिर से उठ जाना किसी भी बच्चे के जीवन का सबसे गहरा आघात होता है, और सिर पर छत न हो तो यह संघर्ष और भी बढ़ जाता है। लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना ऐसे ही निराश्रित बच्चों और जरूरतमंद युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को आवास, शिक्षा, कौशल विकास और विवाह अनुदान देकर उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दे रही है। शिमला जिला के अंकित और अभिषेक जैसे युवाओं की कहानियाँ इस बात का जीता-जागता प्रमाण हैं।

ठियोग तहसील के बशनोग गाँव के रहने वाले अंकित कुमार ने कम उम्र में ही माता-पिता का साया खो दिया था। नानी के पालन-पोषण में बड़े हुए अंकित के पास अपना पक्का घर न होने के कारण भविष्य को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। ऐसे में मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना उनके लिए वरदान साबित हुई और योजना के तहत उन्हें आवास निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली, जिससे उनके अपने घर का सपना साकार हो रहा है। इसके अलावा, विवाह के लिए 2 लाख रुपये की मदद मिलने से उन्हें जीवन की एक नई और सुरक्षित शुरुआत करने में बड़ा सहयोग मिला है।

रामपुर तहसील के रुनपू गाँव के 24 वर्षीय अभिषेक कुमार का बचपन भी भारी संघर्षों में बीता। 10 वर्ष की उम्र में पिता और दो साल बाद माता के निधन के बाद उन्हें बाल आश्रम में रहना पड़ा, जहाँ दसवीं के बाद उन्होंने अपनी बहन की प्रेरणा से इलेक्ट्रीशियन का काम सीखा। गाँव लौटने पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के जरिए उन्हें योजना की जानकारी मिली और जर्जर हो चुके पुराने घर की जगह अब इस योजना से मिले 3 लाख रुपये की मदद से वह अपना नया आशियाना बना रहे हैं। अभिषेक गर्व से कहते हैं कि कल तक उनके पास अपना घर नहीं था, लेकिन आज मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना ने उन्हें भविष्य को संवारने का पूरा विश्वास दिया है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी (ICDS) ममता पॉल ने बताया कि शिमला जिला में 0 से 27 वर्ष आयु वर्ग के 257 बच्चों को इस योजना के जरिए सामाजिक सुरक्षा मिल रही है। इसके अतिरिक्त, 12 बाल देखभाल संस्थानों के 237 बच्चों को त्योहार अनुदान, वस्त्र और पौष्टिक आहार जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। जिला में अब तक 30 चिल्ड्रन ऑफ़ द स्टेट को आवास निर्माण, 12 को विवाह अनुदान, 19 को उच्च शिक्षा, 11 को व्यावसायिक शिक्षा, 8 को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग तथा 8 को स्टार्टअप शुरू करने के लिए आर्थिक मदद प्रदान की गई है।

शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला प्रशासन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संबंधित विभागों को यह निर्देश दिए गए हैं कि हर पात्र बच्चे तक लाभ पहुँचे और समयबद्ध तरीके से आवेदनों का निपटारा सुनिश्चित किया जाए ताकि कोई भी युवा इस सहायता से वंचित न रहे। यह योजना यह साबित कर रही है कि कठिन परिस्थितियों में भी सरकार हर जरूरतमंद बच्चे के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके सपनों को नई उड़ान दे रही है।

Major Highway Push: Himachal Fast-Tracks ₹3,000 Crore PMGSY Road Projects

Sponsored

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

Related articles

HP Ministers Slam Centre Over Pending ₹112 Crore Health Funds

In a joint press statement issued from Shimla, Health Minister Dr. (Col.) Dhani Ram Shandil and Industries Minister...

डिजिटल क्रांति का मेला: धर्मशाला में 16-17 अक्टूबर को ई-गवर्नेंस सम्मेलन

मुख्य सचिव के.के. पंत की अध्यक्षता में 16 और 17 अक्टूबर, 2026 को कांगड़ा जिले के धर्मशाला में...

Strict Campus Security Rules Across HP Private Universities

In line with CM Sukhu's directives to ensure student safety across Himachal Pradesh, Director General of Police Ashok...

Governor Unveils 100-Day Youth Roadmap at Nauni University

At a ceremony held at Dr. Y.S. Parmar University of Horticulture and Forestry, Governor and Chancellor Kavinder Gupta...