नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे के उलट अपने चहेतों और मित्रों को उपकृत करने के लिए नियम-कायदों को ताक पर रख रही है। शिमला से जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को सेवा विस्तार देने और हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया को अकारण रद्द करने के मामलों में माननीय उच्च न्यायालय के हालिया फैसलों ने सरकार की तानाशाही कार्यप्रणाली को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। उन्होंने जल शक्ति विभाग के एक अधिकारी के सेवा विस्तार पर अदालत द्वारा उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए कहा कि मित्रमंडल को लाभ पहुंचाने के लिए किस हद तक मनमानी की जा रही है, यह पूरा प्रदेश देख रहा है।
उद्योग जगत की बदहाली का जिक्र करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भले ही आत्मनिर्भर हिमाचल के बड़े-बड़े दावे करते हों, लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश आज बिना किसी स्पष्ट औद्योगिक नीति के चल रहा है। गत वर्ष 31 दिसंबर को समाप्त हुई औद्योगिक नीति की अवधि केवल तारीखें बढ़ाकर टाली जा रही है, जिससे राज्य की 30,000 से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत साफ न होने के कारण उद्योग आज सत्ता-संरक्षित लोगों के लिए केवल उगाही का साधन बनकर रह गए हैं, जबकि सरकार को प्रदेश के हितों और अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ठोस नीति लानी चाहिए।
इन राजनीतिक मुद्दों के अलावा, जयराम ठाकुर से उनके आधिकारिक आवास पर सिलाई के पूर्व विधायक बलदेव तोमर के नेतृत्व में हाटी समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की, जिसमें हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने और लगभग 60 वर्षों के लंबे संघर्ष से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, सोलन जिला भाजपा अध्यक्ष रतनपाल सिंह और पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा के नेतृत्व में अर्की विधानसभा क्षेत्र से आए एक अन्य प्रतिनिधिमंडल ने भी उनसे भेंट कर स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
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