हिमाचल प्रदेश में नशे के काले साए को मिटाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी है। हाल ही में उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित एनकॉर्ड की अहम बैठक में नशा तस्करों को जड़ से उखाड़ने और युवाओं को सुरक्षित भविष्य देने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए। उपायुक्त ने साफ़ शब्दों में कहा कि नशा विरोधी आंदोलन को ज़िले के हर एक स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान तक पहुँचाया जाएगा। इसके साथ ही, उनका सबसे बड़ा ज़ोर इस बात पर रहा कि जो युवा नशे की दलदल से बाहर निकल चुके हैं, उन्हें पूरे सम्मान और संवेदनशीलता के साथ समाज की मुख्य धारा में वापस जोड़ा जाए। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर सड़क किनारे बने ढाबे सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा जमाकर नशे का कारोबार करते पाए गए, तो उन पर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। सभी अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अगली बैठक में इस अभियान से जुड़ी अपनी प्रगति रिपोर्ट और ठोस प्रेजेंटेशन के साथ पेश हों।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह के नेतृत्व में ज़िला पुलिस ने तस्करों के नेटवर्क पर करारा हमला बोला है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल नशे से जुड़े कुल 291 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनके तहत 567 पुरुषों और 19 महिलाओं समेत रिकॉर्ड 586 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचाया गया है। पुलिस केवल तस्करों को गिरफ्तार ही नहीं कर रही, बल्कि उनके फैलाए जाले को भी तबाह कर रही है, जहाँ इस साल अब तक 66 बड़े तस्करी नेटवर्क ध्वस्त किए जा चुके हैं। सबसे बड़ा प्रहार तस्करों की आर्थिक कमर पर किया गया है, जहाँ वित्तीय जाँच के ज़रिए नशा तस्करी से जुटाई गई 12.5 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति को फ्रीज़ कर दिया गया है।
कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन का ध्यान बचाव और जागरूकता पर भी केंद्रित है। इस कड़ी में पुलिस अधिकारियों द्वारा 19 से अधिक स्कूलों का दौरा कर विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं और 15 से ज्यादा पंचायत बैठकों में आम जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा, अवैध कब्जों और संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए ज़िले के 2,003 लोगों के सत्यापन का काम तेज़ी से जारी है, जिनमें से 940 का सत्यापन पूरा हो चुका है और रोहड़ू क्षेत्र में अवैध निर्माणों को ढहा दिया गया है। कड़े फैसलों, ज़मीनी कार्रवाई और जन-भागीदारी का यह संगम यह साफ़ संदेश देता है कि शिमला को नशामुक्त बनाने का यह अभियान अब अपने सबसे निर्णायक दौर में पहुँच चुका है।


