शिक्षण संस्थानों में सुगम्य पुस्तकालय बनाए जाएं 

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हिमाचल में विकलांगता नीति बनाने की मांग

शिमला, 2 दिसम्बर –  हिमाचल  प्रदेश राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सभी स्कूलों और कॉलेजों में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की तर्ज़ पर सुगम्य पुस्तकालय बनाने का वादा पूरा करें। उन्होंने मांग की कि प्रदेश में नई राज्य विकलांगता नीति बनाई जाए। एक दशक पहले बनी विकलांगता नीति अब पुरानी पड़ चुकी है। विकलांगजन अधिकार कानून 2016 के मद्देनजर नई नीति बनाई जानी चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय विकलांगता दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भेजे एक पत्र में अजय श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश में विकलांगजन अधिकार कानून के प्रावधान लागू करने की रफ्तार बहुत सुस्त है। दिव्यांगजनों को उनके अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में दखल देने की मांग की।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष ने कहा कि  विकलांगों की शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मसले हल नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जून 2015 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी जनहित याचिका पर दिव्यांगों को प्रदेश में सभी सरकारी शिक्षण संस्थाओं में पीएचडी स्तर तक मुक्त शिक्षा देने के आदेश दिए थे।
सरकार ने बहुत दबाव बनाने के बाद स्कूल और कॉलेज स्तर की शिक्षा दिव्यांगों के लिए निशुल्क कर दी। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने वर्ष 2015 में ही कोर्ट के आदेश लागू कर दिए थे।
लेकिन सरकार ने मेडिकल और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में दिव्यांगों के लिए अभी तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान लागू नहीं किया है।  दिव्यांगजन मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, पॉलीटेक्नीक और आईटीआई आदि संस्थानों में मुफ्त शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं।
प्रदेश के शिक्षण संस्थानों को कानून के मुताबिक दिव्यांगों के लिए बाधारहित बनाने, वहां सुगम्य पुस्तकालय खोलने एवं अन्य सुविधाएँ जुटाने की दिशा में भी कोई काम नहीं किया गया है। जबकि मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सुगम्य पुस्तकालय का  उद्घाटन करने के बाद गत वर्ष 22 जुलाई को मंच से यह आश्वासन दिया था।
प्रो. श्रीवास्तव ने कहा दिव्यांगों के लिये आरक्षित पदों पर नियुक्ति देने में भी लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री को स्वयं दखल देना चाहिए ताकि विकलांग वर्ग को न्याय मिल सके।

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