आर्य समाज शिमला: सामाजिक सौहार्द और विकास का मार्ग

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समाज की उन्नति के लिए सभी वर्गों एवं समुदायों का योगदान और उनमें आपसी सद्भाव तथा एकता का होना जरूरी है। आपस में वैमनस्य होने से विकास का मार्ग अवरुद्ध होने लगता है और प्रशासन एवं समाज की सारी शक्ति समस्याओं को सुलझाने में जाया हो जाती है

आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद की 220वीं जयंती के अवसर पर आर्य समाज लोअर बाजार शिमला के 142वें वार्षिक उत्सव और आर्य वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर शिमला के विधायक श्री हरीश जनार्था मुख्य अतिथि थे इस अवसर पर हरीश जनार्दन ने कहा कि आर्य समाज का शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान रहा है और शिमला की आर्य पाठशाला ने उस समय महिलाओं को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया था जब इस क्षेत्र में कन्याओं की शिक्षा के लिए अधिक अवसर नहीं थे।

उन्होंने कहा कि यह वर्ष स्वामी जन्मदिन आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद की दोस्तों भी जयंती के उपलक्ष में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया गया है इस दृष्टि से आर्य समाज का उत्सव विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि आर्य कन्या पाठशाला ने साधनों की कमी होते हुए भी शिक्षा, खेलकूद, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में नाम कमाया है। इसलिए सभी शिक्षक और छात्र-छात्राएं बधाई के पात्र हैं।

आर्य वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिमला के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर संस्था के प्रबंधक श्री हृदयेश आर्य ने कहा कि आर्य समाज शिमला की स्थापना के 142 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और आर्य पाठशाला भी इस क्षेत्र में बहुत पहले स्थापित की गई थी।
उन्होंने बताया कि आर्य समाज शिमला का स्वतंत्रता आंदोलन और हिंदी सत्याग्रह में विशेष योगदान रहा है।

समझ में समझ में विद्यार्थियों और आर्यजनों को संबोधित करते हुए डॉक्टर शिवा भारद्वाज ने अपने शोध पूर्ण व्याख्यान में कहा कि आर्य समाज शिमला स्वतंत्रता आंदोलन और समाज सुधार की गतिविधियों का केंद्र रहा है यही से हिमाचल प्रदेश में भी आर्य समाज का प्रचार प्रसार हुआ है आर्य समाज शिमला 142 वर्षों का इतिहास समेटे हुए हैं महात्मा गांधी और लाल लाला लाजपत राय का आर्य समाज के हाल में व्याख्यान देना और महिलाओं तथा आर्यजनों को संबोधित करना, एक ऐतिहासिक घटना है।

समारोह के दौरान विधायक हरीश जनार्था द्वारा शिक्षा, खेलकूद और अन्य गतिविधियों में विशिष्ट उपलब्धियां अर्जित करने वाले लगभग साठ छात्र-छात्राओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर श्रीमती कौशल्या वर्मा ने पाठशाला की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विभिन्न गतिविधियों का उल्लेख किया। कार्यक्रम का संचालन मनोज शर्मा द्वारा किया गया।

वार्षिक उत्सव के दौरान पाठशाला के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत की गई जिसमें नर्सरी केजी का डांस, सर पे हिमालय नृत्य, संस्कृत नाटी,भारत की बेटी, पहाड़ी नाटी आदि कार्यक्रम संपन्न हुए। कार्यक्रम के दौरान कौशल्या वर्मा द्वारा पाठशाला की वार्षिक पर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। अनुपम गुलेरिया द्वारा धन्यवाद किया गया।

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Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

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