January 12, 2026

अंधेरे से रोशनी तक: दृष्टिबाधित छात्रा बनी कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर

Date:

Share post:

आंखों में रोशनी न होने के कारण जिस बच्ची को मंडी के एक स्कूल ने दाखिला देने से इनकार कर दिया था, वह अब कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर बन कर अन्य बच्चों को ज्ञान की रोशनी बांटेगी। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पीएचडी की छात्रा, राष्ट्रीय रिसर्च फैलोशिप विजेता और उमंग फाउंडेशन की सदस्य प्रतिभा ठाकुर ने आज शिमला के प्रतिष्ठित राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय में प्रिंसिपल डॉ. अनुपमा गर्ग के समक्ष राजनीति विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर का कार्यभार ग्रहण किया। 

इस अवसर पर प्रतिभा के पिता खेमचंद शास्त्री और राज्य विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य प्रो. अजय श्रीवास्तव के अलावा उसके संबंधी हेमंत ठाकुर एवं प्रदेश विश्वविद्यालय से बॉटनी में पीएचडी की दिव्यांग छात्रा अंजना ठाकुर भी उपस्थित थी। प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसपी बंसल ने प्रतिभा ठाकुर को उसकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभा ने खुद को दृष्टिबाधित होने के कारण लाचार नहीं समझा और कड़ी संघर्षों से उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज में अपना स्थान बनाया। अब वह दूसरे दिव्यांग बच्चों के लिए एक रोल मॉडल है।

प्रिंसिपल डॉ. अनुपमा गर्ग ने कॉलेज के सभी शिक्षकों से प्रतिभा ठाकुर का परिचय कराया और कहा कि उससे युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए उमंग फाउंडेशन के प्रयासों की भी प्रशंसा की। मंडी जिले के ग्राम मटाक, तहसील कोटली के निवासी और पेशे से पत्रकार खेमचंद शास्त्री एवं शिक्षिका सविता कुमारी की बेटी प्रतिभा जन्म से ही दृष्टिबाधित है। उसे स्कूल में जब दाखिला देने से इंकार कर दिया गया तो वह बहुत रोई और पढ़ने की जिद ठान ली। मजबूरी में पांचवी तक उसने घर पर ही पढ़ाई की और छठी कक्षा में एक स्कूल में दाखिला मिल गया। उसने हर परीक्षा उच्च प्रथम श्रेणी में पास करके शिक्षकों का भी दिल जीता। आजकल वह प्रदेश विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में डॉ महेंद्र यादव के निर्देशन में पीएचडी कर रही है।

प्रतिभा ठाकुर ने खुद को बहुमुखी प्रतिभा का धनी साबित किया। स्कूल और कॉलेज स्तर पर वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और काव्य पाठ में न सिर्फ उस ने हिस्सा लिया बल्कि कई पुरस्कार भी जीते। वह एक संवेदनशील कवियत्री है और कई बार रक्तदान भी कर चुकी है। उसका कहना है कि वह दूसरे दिव्यांग बच्चों की हर प्रकार से मदद करना चाहती है। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों, मित्रों और उमंग फाउंडेशन को दिया।

गत सप्ताह एक अन्य दृष्टिबाधित पीएचडी स्कॉलर और भारतीय चुनाव आयोग की ब्रांड एंबेसडर एवं गायिका मुस्कान ने राजकीय कन्या महाविद्यालय में संगीत की असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर ज्वाइन किया है। दिव्यांगों के लिए काम कर रही संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि यदि दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग बच्चों को परिवार समाज और सरकार आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दे तो यह बच्चे कोई भी ऊंचाई छू सकते हैं।

Education Minister Thanks Teachers For Contribution Towards CM Relief Fund

Daily News Bulletin

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

India Leads Global Renewable Push at IRENA 2026

Union Minister for New and Renewable Energy Pralhad Joshi today delivered India’s national statement at the 16th Assembly...

This Day In History

49 BC Julius Caesar made his historic crossing of the Rubicon, triggering a civil war in Rome. 1759 London’s British Museum...

Today, 11 january 2026 : National Human Trafficking Awareness Day

National Human Trafficking Awareness Day (US) is observed to raise public awareness about human trafficking, which involves the...

HPSEBL Sees Sharp Rise in Power Sale Revenue

The Himachal Pradesh State Electricity Board Limited (HPSEBL) has recorded a revenue of approximately Rs. 300 crore from...