दीप्ति सारस्वत प्रतिमा

उनींदा मौसम तंद्रालीन, बादलों की श्यामल चादर, तान के पसरा है, पहाड़ों पर, संध्या सिंदूरी न हुई आज, सूरज विमुख रहा पूरा दिन, रुआंसा सा हो आया है, क्षितिज का मन I

 

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