पुस्तक समीक्षा: प्रेम में होना (काव्य संग्रह)

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डॉ. कमल के. प्यासा  

‘प्रेम में होना’ काव्य संग्रह राजीव कुमार त्रिगर्ती का तीसरा काव्य संग्रह है, जो कि पी. पी. पब्लिशिंग भारत द्वारा साहिबाबाद से प्रकाशित हुआ है। 110 पृष्ठों की इस पुस्तक में कुल मिला कर 81 कविताएं शामिल हैं। सभी कविताएं जैसा कि पुस्तक का शीर्षक उजागर करता है ‘प्रेम में होना’ अर्थात समस्त कविताएं प्रेम से ही संबंधित हैं। युवा कवि राजीव कुमार त्रिगर्ती पूरी तरह से प्रेम के सागर में डूबते हुवे प्रतीत हो रहे हैं। हों भी भला क्यों न, प्रेम भी तो इस अवस्था में, मूल जैविक आवश्कता होती है जो अवस्था अनुसार ही पनपती है।फिर इसके बिना जीवन भी तो परिपक्व नहीं हो पाता और आगे का समस्त विकास भी तो रुक जाता है। इसी लिए प्रेम में होना लाजमी हो जाता है, दूसरा प्रेम भी तो दिल की ही बात है न, इसमें दिमाग कुछ नहीं कर पाता क्योंकि उम्र के साथ दिल में कई प्रकार के विचार पनपते हैं, जिससे बाकी सब कुछ बिसर सा जाता है और फिर ऐसे में प्रेम में होना ही चलता है। इस काव्य संग्रह ‘प्रेम में होना’ की समस्त कविताओं को 7 श्रेणियों में रखा जा सकता है, जो कि इस प्रकार से हैं:
1. प्यार क्या है
2. प्रेमिका से संबंधित
3. प्रेमिका के सौंदर्य से संबंधित
4. प्रेमी की नजर में  प्रेमिका (प्रेमी के लिए सब कुछ वही है)
5. प्रेमी का अपने व प्रेमिका के प्रति विचार
6. प्रेमी का अपने बारे विचार
7. कविता में प्रेमिका

प्यार क्या है, वाली कविताओं को देखा जाए तो इन समस्त कविताओं में, कवि अपनी कविता के माध्यम से अपने प्यार को दिखाते हुए, उसे (प्यार को) स्पष्ट करने की कोशिश करता हुआ प्रतीत होता है, जैसे कि कविता ‘प्यार जताने के लिए’ में लिखा है:
प्यार जताने के लिए
यह जरूरी नहीं
कि मैं तुम से मिलूं
किसी ऐसे स्थान पर
जहां कूक  रही हो
आप्रकुंज में कोयल

इसी तरह से कविता ‘प्रेम में’ कवि लिखता है:
नवजातों की नींद में पलता है
बचपन की किलकारियों में गूंजता है
किशोरों के सपनों में लेता है अंगड़ाई
धड़कता है युवाओं में प्राण बन कर
अधेड़ों की चाल में सुस्तता है
टिमटिमाता हैं वृद्धों की आंखों में जुगनू सा!
प्यार को दिखाती ऐसी ही बहुत सी लेखक की कविताएं पुस्तक में शामिल हैं।

प्रेमिका से संबंधित कविताओं में कविता ‘मेरे लिए’ देखी जा सकती है, जिस में कवि कहता है:
मैंने चाहा
तुम मुस्कुराती रहो
ताकि लजा जाए चांद भी
मैने चाहा
तुम इतराओ झूमो महको
निखरे तुम्हारी रंगत
ताकि लजा जाए कमल

ऐसे ही एक अन्य कविता है ‘आओ ऐसे जीते हैं’
तुम मेरी सांसे बनो
मैं तुम्हारी सांसे बनता हूं
एक दूजे को जीते हैं
आओ

प्रेमिका के सौंदर्य संबंधी शामिल कविताओं में आ जाती है कविता ‘सहज वसंत की चाह में’ जिसमें शुरू की कुछ पंक्तियां कैसे प्रेमिका के सौंदर्य को दर्शाती हैं:
तुम्हारी मुस्कुराहट की
गुनगुनी धूप में
खिल जाता हूं सूरजमुखी सा
तुम्हारे कुंतलों की
बदलियों की छांव में
छा जाती है मुझ पर हरयाली
तुम्हारी मुस्कुराहट की
शीतल बयार में
उड़ने लगता हूं हिमकणों सा

ऐसे ही एक अन्य कविता ‘तुम्हे देखने के बाद’ में कवि के विचार कुछ इस प्रकार से पढ़ने को मिलते हैं:
तुम्हें सोचने भर से ही
तैर जाती है मुस्कुराहट
पोर पोर हो जाता है सुगंधित
जैसे फूलों की वाटिका से
चले आते हों अगणित
वासंती बयार के झोंके।

प्रेमी की नजर में प्रेमिका, वाली कविताओं में शामिल कविता में ‘मुझ में मेरे होने जैसी’ वाली कविता में कवि कहता है:
कैसे कहूं तुमसे
कि करता हूं बहुत प्यार
कैसे दिखाऊं तुम्हें
आंखों में डुबकियां मारते
ह्रदय की अतल गहराईयों में
रंगीन मछलियों की तरह तैरते
तुम्हारे हसीन सपनों को
कैसे

इसी तरह से ‘सच में भयावह है’ एक दूसरी कविता में कवि कुछ इस तरह से अपने विचार प्रकट करता है:
तुम साज बनाओ
मैं बजाते हुए गाना गाऊंगा
तुम चित्र बनाओ
मैं भरता हूं रंग
तुम निर्देशन करो
मैं करूंगा अभिनय
तुम नाचो खुल कर
मैं बजाऊंगा ढोल

प्रेमी प्रेमिका कवि की दृष्टि में वाली कविता ‘अनंत काल तक प्रेम के लिए’ में कवि कहता है:
एक बार सोचता हूं
कि तुम मुझ से कोई चाह न रखो
मैं भी तुम से कोई चाह न रखूं
दोनों तरफ पलता रहे प्रेम
बिना किसी औपचारिकता के
लेता रहे हमेशा हमारे भीतर अपनी सांसे
पर लगता नहीं
कि संभव है ऐसा

इसी तरह की ‘संदेश की मृत्यु पर वक्तव्य’ वाली कविता में भी कवि का संदेश कुछ इस तरह से पढ़ने को मिलता है:
सोचता हूं
नव वर्ष पर
एक छोटा सा संदेश भेज दूं
पर भेज नहीं पाता हूं
नहीं जुगाड पाता हूं इतना साहस

प्रेमी (कवि) केवल अपने संबंध में कविता ‘कल्पना से यथार्थ तक’ में अपने संबंध में कहता है:
जब तक विचरता रहता हूं
कल्पना लोक में
तैरता रहता हूं
सपनों के पोखर से समुद्र तक
इस बीच पूरी दुनिया
मेरी मुट्ठी में होती है

ऐसी ही एक अन्य छोटी सी कविता है ‘भूलने की कोशिश में’ जिसमें प्रेमी कहता है:
पता नहीं कैसे
पता नही क्यों
मैं आज कल
एक अजीब काम कर रहा हूं
तुम्हें भूलने की कोशिश में
हद से जायदा
याद कर रहा हूं! और

कविता और प्रेमिका के संबंध की कविताएं कवि द्वारा पुस्तक के अंत में डाल रखी हैं। जिसमें क्रमांक 74 से 79 तक की कविताएं शामिल की जा सकती हैं। क्रमांक 74 की ‘लिख रहा हूं कुछ अच्छी कविताएं’ की कुछ पंगतियाँ इस प्रकार से हैं:
तुम होती हो पास
सामने बैठ कर लेती हो अंगड़ाई
तैरती है हवा में स्मितहास
और मैं लिखता हूं कविता

‘प्रेम कविताएं’ की पंगतियां हैं:
क्यों लिखते हैं
अनंत कवि अनंत प्रेम कविताएं
एक पर एक निरंतर
इतना कठिन काम
कैसे होता है सम्भव
इतना सरल हो कर

कविता ‘मेरी कविता जवां हो रही है’ की पंगतियां हैं:
तुम मेरी कविता में बैठी रहती हो चुपचाप
पूछती हो मुझ से न जाने किस अपने पन से
और जब मैं भीतर की उथल पुथल को
लेखनी की नोक तले
कागज पर उतरता हूं
प्रतीकों के माध्यम से
तब पता नहीं तुम क्यों मुस्कुरा देती हो

कुल मिला कर देखा जाए तो युवा कवि राजीव त्रिगर्ति की कविताएं चाहे प्रेमी और प्रेमिका के पवित्र प्रेम को उजागर करती हैं, वही इन समस्त कविताओं में कवि द्वारा प्रेम संबंधी सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए प्रेम क्या होता है, कैसे होता है के साथ ही साथ प्रेमिका के सौंदर्य के हर पहलू को उजागर किया है। उसकी कजरारी आंखों, बालों, गुलाबी होंठों के साथ मधुर मुस्कान की भी खुल कर चर्चा कविताओं के माध्यम से पढ़ने को मिलती है। फिर एक प्रेमी अपनी प्रेमिका के बारे में क्या सोचता है, उसका व्यवहार और प्रेमिका का साथ कैसा होना चाहिए का भी इन्हीं कविताओं को पढ़ने से पता लग जाता है। अंत में कहा जा सकता है कि प्रेम में होना भी यथार्थ जीवन का एक अनिवार्य व महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

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