दौड़ विकास की : डॉo कमल केo प्यासा

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दौड़ विकास की : डॉo कमल केo प्यासा
प्रेषक : डॉ. कमल के . प्यासा

हो रहा है
छलनी छलनी
सीना धरती का,
नदी का
पहाड़ का !

जंगल
बने मैदान ,
पेड़ों का मिटा निशान !
बिगड़ा संतुलन,
पशु पक्षी
सब चुप चाप
उदास और निराश !

क्योंकि, बेजान हैं,
बेजुबान हैं
सब ।
क्या करें ?
बोल सकते नहीं !

कौन दे दलील
कैसे कहां
करें अपील ?
है नहीं
कोई वकील !

विकास की
अंधी दौड़ में,
रेत, बजरी और
पत्थर पानी की
मांग बहुत बड़ी है !
कैसी विकास की दौड़ चली है !

Daily News Bulletin

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