डॉ. कमल के. प्यासा – जीरकपुर, (मोहाली)
स्वतंत्रता से पूर्व चंबा व कुल्लू कांगड़ा में ही पड़ते थे और कांगड़ा के समस्त ताम्र पट्ट व धातु प्रतिमाओं आदि का वृतांत चंबा के साथ ही, किया मिलता है।
कुल्लू के निम्नलिखित धातु अभिलेखों के बारे देखते हैं जिनका विवरण प्राप्त हुआ है ।
1.समुद्र सेन का निरमंड अभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : धातु।
अभिलेख प्रकार : धातु ताम्र पट्ट अभिलेख।
अभिलेख काल : 7वीं शताब्दी।
अभिलेख लिपि : ब्राह्मी, भाषा संस्कृत।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : निरमंड कुल्लू।
अभिलेख विवरण : कुल्लू के निरमंड से प्राप्त यह ताम्र पट्ट अभिलेख ब्राह्मी लिपि का, संस्कृत भाषा में देखा गया है। सातवीं शताब्दी के इस ताम्र पट्ट अभिलेख से सुबीस ग्राम से बुलाए ब्राह्मणों को दी गई भूमि की जानकारी मिलती है। इसी अभिलेख से निरमंड क्षेत्र के साथ लगने वाली मण्डी की सीमाओं की भी जानकारी हो जाती है। अभिलेख को महासमान्त समुद्र सेन द्वारा जारी किया गया था।
2.राजा बहादुर सिंह ताम्र पट्ट अभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : धातु।
अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।
अभिलेख काल : 16वीं शताब्दी।
अभिलेख लिपि : टांकरी, बोली कुल्लुवी।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : भूरी सिंह म्यूजियम, चंबा।
अभिलेख विवरण : इस ताम्र पट्ट अभिलेख को कुल्लू के राजा बहादुर सिंह (1559ईस्वी) द्वारा अपनी तीन बेटियों, (सुनू,गंगा और रांगो), के चंबा के शासक के यहां वैवाहिक संबंधों की खुशी में जारी करवाया था। ताम्र पट्ट अभिलेख में चंबा के राजा गणेश वर्मन के गुरु पंडित रमापति को कुल्लू के राजा बहादुर सिंह द्वाराभूमि अनुदान देने का ब्यौरा दिया गया है, जिसमें बजौरा व हाट गांव का उल्लेख भी किया गया है। इस ताम्र पट्ट का उल्लेख पहले चंबा के अभिलेख वृतांत में भी किया जा चुका है।
- पृथी पाल ताम्र पट्ट अभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : धातु।
अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।
अभिलेख काल : 17वीं शताब्दी।
अभिलेख लिपि : टांकरी, भाषा संस्कृत।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : कुल्लू।
अभिलेख विवरण : कुल्लू के राजा पृथी पाल (1670ईस्वी) का यह ताम्र पट्ट अभिलेख जो कि टांकरी लिपि व संस्कृत भाषा में है, से उस समय की प्रशासनिक व सामाजिक स्थितियों की जानकारी मिलती है। इसके साथ ही साथ किन किन ब्राह्मणों को दान में, कहां कहां जमीन दी गई उसका भी ब्यौरा इस ताम्र पट्ट अभिलेख से मिल जाता है।
इन ताम्र पट्ट अभिलेखों के अतिरिक्त कुल्लू क्षेत्र से देवी देवताओं के मुखौटों पर उत्कीर्ण अभिलेखों में देवी_देवता का नाम, क्षेत्र, स्थान निर्माण करता, भेंट करता व निर्माण समय आदि को लिखा देखा जा सकता है।
कुल्लू से एक मात्र तांबे का सिक्का पहली या दूसरी श. ई.पूर्व का प्राप्त हुआ है, जिस पर खरोष्ठी लिपि में “वीरयशस राज कुलू तास” लिखा देखा गया है। इससे कुल्लू का इतिहास बहुत पीछे चला जाता है।



