हिमाचल : पाषाण अभिलेख, संदर्भ चंबा – डॉ. कमल के. प्यासा

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डॉ. कमल के. प्यासा – मण्डी

चंबा एतिहासिक परिचय:

छठी शताब्दी के आसपास अयोध्या के राज परिवार से संबंधित राजू मारु वर्मन इधर पहाड़ी क्षेत्र में रावी के ऊपर ओर बढ़ते हुए किसी तरह ब्रह्मपुर (भरमौर) जा पहुंचा और क्षेत्र के छोटे छोटे शासकों, राणों को हरा कर व भरमौर को अपनी राजधानी बना कर यही शासन करने लगा। इस तरह मारु वर्मन के पश्चात 67 शासक भरमौर में अपना शासन चलाते रहे। 920 ईसवी में राजा साहिल वर्मन ने अपनी पुत्री चंपावती के कहे अनुसार भरमौर से नीचे की ओर रावी नदी के किनारे राजधानी बना कर, बेटी के नाम पर शहर का नाम चंबा रखा दिया। यही चंबा आज के प्राचीन एतिहासिक व सांस्कृतिक शहरों में अपनी विशेष पहचान रखता है। इसकी प्राचीन ऐतिहासिकता निम्नलिखित पाषाण अभिलेखों से भी हो जाती है।

चंबा क्षेत्र से मिलने वाले पाषाण अभिलेख:

1.ग़म अभिलेख

अभिलेख श्रेणी : पाषाण

अभिलेख प्रकार : शिलालेख

अभिलेख का नाम : ग़म

परोली अभिलेख।

अभिलेख काल : छठी – सातवीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा व टांकरी, भाषा चम्बयाली व संस्कृत।

अभिलेख मिलने का स्थान : चंबा रावी नदी के दाएं किनारे, ग़म गांव।

अभिलेख का विवरण : ग़म व परोली दोनों अलग अलग अभिलेख हैं। इसे राणा आशाद देव (मेरु वर्मन के समय) द्वारा बनाया गया था और इसमें उस समय के सामंतों (राणों) के साथ साथ उनकी शक्तियों व आम लोगों के प्रति किए जाने वाले व्यवहार की जानकारी मिलती है।

2.परोली अभिलेख

अभिलेख श्रेणी : पाषाण।

अभिलेख प्रकार : चट्टान अभिलेख।

अभिलेख काल : छठी _सातवीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा व टांकरी लिपि, भाषा चम्बयाली व संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : पराली नाला, चंबा।

अभिलेख विवरण : इस अभिलेख में भूमि अनुदान, मंदिरों के निर्माण, मूर्ति स्थापना, फव्वारों के निर्माण व जल के संरक्षण की जानकारी मिलती है।

3 देव कोठी अभिलेख

अभिलेख श्रेणी : पाषाण

अभिलेख प्रकार : शिलालेख

अभिलेख काल : अठारहवीं शताब्दी ।

अभिलेख लिपि : शारदा व टांकरी भाषा चम्बयाली।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : देव कोठी (चूराह घाटी) मंदिर परिसर।

अभिलेख विवरण : देव कोठी मंदिर के निर्माण के संबंध में जानकारी मिलती है, जिसे राजा उमेद सिंह ने 1754 ईसवी में अपनी मन्नत के पूरा होने पर इस शिलालेख को स्थापित करवाया था और मंदिर का निर्माण भी राजा उमेद सिंह द्वारा करवाया गया, जिसको गुरदेव व झंडा ने बनाया व मंदिर में भित्ति चित्रण भी किया आदि सब कुछ शिलालेख में लिखा है।

4.सुई रानी शिलालेख।

अभिलेख की श्रेणी:पाषाण

अभिलेख प्रकार : शिलालेख।

अभिलेख काल : दसवीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा व टांकरी, भाषा चम्बयाली।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : सुई माता मंदिर, शाह मदार पहाड़ी, चंबा।

अभिलेख विवरण : शिलालेख में चंबा शहर की (दसवीं शताब्दी में) पानी की समस्या के वृतांत के साथ साहिल वर्मन की पत्नी रानी सुनयना द्वारा जीवित समाधि के बारे में जानकारी दी गई है।

5.मेरु वर्मन जय स्तंभ अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : पाषाण।

अभिलेख प्रकार : पाषाण स्तंभ अभिलेख।

अभिलेख काल:680, ईस्वी (सातवीं शताब्दी)।

अभिलेख लिपि:शारदा व कुटिल, भाषा संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : भरमौर के प्राचीन मंदिर, लक्षणा देवी मंदिर, परिसर।

अभिलेख विवरण : इस अभिलेख से मेरु वर्मन के संबंध में अनेकों जानकारियां मिलती हैं। उसकी बहादुरी के संबंध में बहुत कुछ बताया गया है। उसने कुल्लू के राजा को हराने के पश्चात ही, अपनी मन्नत के पूर्ण होने पर कई एक मंदिरों का निर्माण करवाया था, जिनमें भरमौर का मणि महेश मंदिर, लक्षणा देवी मंदिर और नरसिंहा मंदिर आ जाते हैं। अभिलेख में मेरु वर्मन के पूर्वजों, जिनमें उसके दादा आदित्य वर्मन व पिता दिवाकर वर्मन का भी उल्लेख आ जाता है। अभिलेख के अंत में मंदिर व मूर्ति निर्माण करता वास्तुकार गुग्गा का भी उल्लेख किया मिलता है।

6.सराह परसराम अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : पाषाण।

अभिलेख प्रकार : शिलालेख।

अभिलेख काल : दसवीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा, संस्कृत कविता रूप में।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : सराह, साहो के समीप, चंबा।

अभिलेख विवरण : इस शिलालेख में एक 22 छंदों वाली कविता को, अभिलेख की नौ पंक्तियों में दिखाया गया हैं, जो संस्कृत (शारदा लिपि) में लिखी हैं, जिनमें साहो के राणा सत्यकि द्वारा शिव मंदिर का वृतांत लिखवाया है। इस शिलालेख की स्थापना व लेखन के पीछे राणा सत्यकि का अपनी पत्नी (रानी) के प्रति अथाह स्नेह प्रकट होता दिखाई देता है। जिसने अपनी पत्नी के लिए शिव मंदिर की खुल कर प्रशंसा के साथ जानकारी दी है।

7.मूल कल्हार झरना (फव्वारा) अभिलेख

अभिलेख की श्रेणी : पाषाण।

अभिलेख का प्रकार : शिलालेख।

अभिलेख काल : छठी – बारहवीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा, भाषा संस्कृत ।

अभिलेख प्राप्ति स्थान:पांगी का गांव कल्हार, चंबा।

अभिलेख विवरण: इस शिलालेख की स्थापना, राजा गायपालक ने अपनी रानी सुरमति की याद में की थी। जिसमें रानी की प्रशंसा उसकी वीरता और साहस के वर्णन के साथ की गई है। अभिलेख के अनुसार उसने अपने ससुर व पिता की सेवा में कोई भी कमी नहीं छोड़ी थी।तभी तो अभिलेख में रानी सुरमति की सुंदरता की प्रशंसा करते हुए यह भी लिखा गया है कि रानी अपने आचरण, गुणों और सदव्यवहार के चलते स्वर्ग लोक पहुंची है। इस अभिलेख से उस समय की महिलाओं की समाज में क्या स्थिति थी की भी जानकारी हो जाती है।

8.सैचू नाला अभिलेख ।

अभिलेख श्रेणी : पाषाण

अभिलेख प्रकार : चट्टान अभिलेख (शिलाखंड अभिलेख)l

अभिलेख काल : दसवीं शताब्दी l

अभिलेख लिपि : शारदा, भाषा संस्कृत l

अभिलेख प्राप्ति स्थान : चम्बा भरमौर मार्ग के, चुराह के सैचू नाला स्थान पर, जो कि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के निकट ही हैl

अभिलेख विवरण : शारदा लिपि में लिखें इस अभिलेख को 10 वीं शताब्दी में राजा ललित वर्मान के शासन में इसे स्थापित किया गया थाl अभिलेख में भूमि के अनुदान के साथ साथ राज्य, में पानी के प्रबंध के लिए झरनों (फव्वारों) से जल आपूर्ति, राजा द्वारा किये गए युद्ध व प्राप्त विजयों की जानकारी भी दी गयी हैl

9.अभिलेख लोह टिकरी।

अभिलेख की श्रेणी : पाषाणl

अभिलेख प्रकार : चट्टान अभिलेख (शिलाखंड अभिलेख)l

अभिलेख काल : 11वीं-12वीं शताब्दीl

अभिलेख लिपि : टांकरी, बोली चम्बयाली l

अभिलेख विवरण : टांकरी लिपि का यह अभिलेख जो कि 11वीं – 12 वीं शताब्दी का राजा सोम देव वर्मन से सम्बंधित है, इससे क्षेत्र के शासकों व सामतों की जानकारी के साथ साथ कई एक अन्य ऐतिहासिक जानकारियां भी उस समय की प्राप्त हो जाती हैँ, जिनमें राणों के आपसी मतभेद वाले उनके झगड़े आदि भी आ जाते हैँl

10.अभिलेख : जस्ता वर्मन सई

अभिलेख श्रेणी : पाषाणl

अभिलेख प्रकार : चट्टान अभिलेख (शिलखंड अभिलेख) l

अभिलेख काल : 12 वीं शताब्दीl

अभिलेख लिपि :शारदा, बोली चम्बयाली l

अभिलेख प्राप्ति स्थान : चम्बा चुराह का सई नामक गांव l

अभिलेख विवरण : 12 वीं शताब्दी के, जस्ता वर्मन (शारदा लिपि) के इस अभिलेख में, जो कि चम्बा चुराह के सई नामक स्थान का हैं से उस समय के शासक की शासन व्यवस्था, इतिहास व संस्कृति की जानकारी हासिल होती हैंl अभिलेख के अंत में कुछ एक स्थानीय लोगों के नाम भी देखे जा सकते हैँ l

11.भटकारा झरना (फव्वारा) अभिलेख

अभिलेख श्रेणी : पाषाणl

अभिलेख प्रकार : शिलालेखl

अभिलेख काल : -7वीं-8वीं शताब्दीl

अभिलेख लिपि : शारदा, भाषा संस्कृतl

अभिलेख प्राप्ति स्थान : चम्बा के भटकारा नामक स्थान से प्राप्त ये चट्टान अभिलेख भरमौर के उस समय के शासक मेरु वर्मन की शासन व्यवस्था, इतिहास, संस्कृति व जल स्रोतों की जानकारी देता हैंl

उस समय जल के स्रोतों के समीप मृत व्यक्तियों, राजाओं, रानियों, ठाकुरों, राणों व औतर (बिना संतान के) आदि की स्मृति में उनके नाम की शिलाये रख देते थे, साथ ही भगवान विष्णु के विभिन्न अवतरों से सम्बंधित, छोटी छोटी शिला प्रतिमाएँ भी रखी जाती थी, इसलिए उस समय जल स्रोतों का विशेष महत्व रहता था।

12.देवी कोठी अभिलेख।

दो अभिलेख श्रेणी : पाषाण l

अभिलेख प्रकार : शिलालेख l

अभिलेख काल : 1762ईस्वी (18 वीं शताब्दी) l

अभिलेख लिपि : टांकरी, बोली चम्बायाली l

अभिलेख प्राप्ति स्थान : चामुंडा देवी मंदिर परिसर, देवी री कोठी चम्बा l

अभिलेख विवरण : यह अभिलेख 18 वीं शताब्दी के राजा राज सिंह के काल का है और इसमें कांडा के राणा व उसकी पत्नी बल्हा के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी गई हैl जिस समय कांडा के राणा की मृत्यु हो गयी तो उसकी पत्नी बल्हा, अपने पति के साथ परम्परा के अनुसार सती होने लगी थी, लेकिन उसके पुत्र नारायण पाल ने, उसे किसी तरह से रोक लिया थाl फिर भी उसने अपने पति के वियोग में सब कुछ खाना पीना ही त्याग दिया था, और दान पुण्य के साथ देवी माता की आराधना करती रहती थी, जब कि उसका शरीर अस्ति पिंजर बन चुका थाl इस अभिलेख की स्थापना भी राजा उमेद सिंह द्वारा की बताई जाती है और अभिलेख को मंदिर परिसर में स्थापित भगवान विष्णु जैसी दिखने वाली प्रतिमा पर (दोनों ऒर के स्तम्भओं के ऊपर), पड़ी शिला में कविता के रूप (टांकारी लिपि, बोली चम्बायाली) में उकेरे देखा व पढ़ा जा सकता हैl

इस तरह चम्बा क्षेत्र से मिलने वाले वैसे तों 36 शिलालेख बताये जाते हैँ, जिनमें 22 झरना (फव्वारा) अभिलेख शामिल हैँ, लेकिन इधर अधिक सामग्री हो जाने के फलस्वरूप उपर्युक्त विवरण में मैंने केवल कुछ मुख्य अभिलेखों की ही जानकारी दी है|

इंसानियत अभी बरकरार है – डॉ. कमल के.प्यासा

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