हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी को बेहत्तर स्वरूप प्रदान करने का प्रयास

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हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी को और अधिक बेहत्तर स्वरूप प्रदान करने एवं अकादमी के कार्य को प्रभावी बनाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती एवं अकादमी स्थापना दिवस के अवसर पर गेयटी थियेटर सम्मेलन कक्ष में आयोजित भाषा संस्कृति साहित्य कला संवाद के अवसर पर मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार राम सुभग सिंह ने अपने संबोधन में यह विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि श्री निवास जोशी द्वारा कार्यक्रम में प्रस्तुत पत्र के माध्यम से अकादमी के संविधान और बाएलाॅज के बीच के अंतर विरोध की बात पता चली। उन्होंने कहा कि इस दिशा में विभाग के मंत्री और सचिव से बात कर कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विनोद भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत पत्र के माध्यम से ऐतिहासिक रिज मैदान पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा और उसके पीछे लिखे गए शब्दों के संबंध में जानकारी मिली एवं लाला लाजपत राय की प्रतिमा के संबंध में मिली जानकारी को भी पर्यटकों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए और अधिक प्रासंगिक बनाया जा सके, उस पर भी विचार करेंगे।

उन्होंने उषा बांदे द्वारा प्रस्तुत पत्र में गांधी जी के व्यक्तित्व को आज के संदर्भ में भी अत्यधिक प्रासंगिक और समसामयिक बताया। उल्लेखनीय है कि आज संवाद कार्यक्रम में श्री निवास जोशी द्वारा अकादमी का संविधान बाएलाॅज के संदर्भ में भाषा कला संस्कृति की विवेचना विषय पर शोध पत्र पढ़ा जबकि महात्मा गांधी जीवन एवं दर्शन विषय पर शोध पत्र डाॅ. उषा बांदे द्वारा प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की शिमला यात्राओं को स्मरण करवाता शोध पत्र विनोद भारद्वाज द्वारा पढ़ा गया, जिसका विषय था महात्मा गांधी का शिमला प्रवास कार्यक्रम। मुख्य सचिव ने आज भाषा एवं संस्कृति विभाग के हिमाचल राज्य अभिलेखागार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन वृत, शिमला यात्राओं पर आधारित दो दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का टेवरन हाॅल गेयटी थियेटर परिसर में उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इस छायाचित्र प्रदर्शनी में चित्र दिल्ली से प्राप्त हुए उन्हें तकनीक के माध्यम से और अधिक स्पष्ट और सुन्दर बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी जी की विभिन्न शिमला यात्राओं के और अधिक चित्रों के संकलन कर संग्रहण करने का प्रयास किया जाएगा ताकि वो देश के विविध अभिलेखागारों के लिए आकर्षण बन सके। कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव भाषा संस्कृति आरडी धीमान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की तथा निदेशक भाषा संस्कृति विभाग पंकज ललित ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया एवं विभाग और अकादमी के परस्पर संबंधो व कार्यों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में सचिव हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी डा0 कर्म सिंह ने कला संवाद कार्यक्रम को अत्यधिक प्रभावी बताया वहीं आज के आयोजन से मिले प्रोत्साहन से आने वाले समय में अकादमी के कार्यों को विस्तार मिलने की संभावना व्यक्त की। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में जगदीश शर्मा, सुदर्शन वशिष्ट, अनिल राकेशी, अरूण शर्मा, तुलसी रमन, अशोक हंस, डाॅ. ओम प्रकाश सारस्वत, केआर भारती, डाॅ. ओम प्रकाश शर्मा, डाॅ. इन्द्र सिंह ठाकुर, भारती कुठियाला, रीता सिंह, नंद लाल ठाकुर, रेखा शर्मा, हितेन्द्र शर्मा, साक्षी शर्मा, अच्छर सिंह परमार, डाॅ. प्रियंका वेद्य, डाॅ. देव कन्या ठाकुर, डाॅ. सत्य नारायण स्नेही, कुंवर दिनेश सिंह, आत्मा रंजन, शंकर वशिष्ट, प्रेम लाल गौतम, मदन हिमाचली, संदेश शर्मा, ईशिता, विद्या नंद सरेक, विनोद भावुक, अशोक गर्ग, जाहिद अबरोल, डाॅ. राकेश शर्मा, डाॅ. सूरत ठाकुर और दीपक शर्मा ने कविता पाठ प्रस्तुत किया।

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