हिमाचल प्रदेश में विश्व क्षय रोग दिवस 2026 के अवसर पर 100 दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान (2.0) का शुभारंभ राज्य स्तरीय समारोह में किया गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ कर्नल धनिराम शांडिल ने कहा कि टीबी-मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और मिशन-आधारित कार्यान्वयन के माध्यम से इसे साकार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में टीबी मामलों में स्थिरता और लगातार गिरावट देखी जा रही है। दिसंबर 2024 में शुरू हुए अभियान के पहले चरण में लगभग 14.9 लाख अतिसंवेदनशील लोगों की पहचान और जाँच की गई, जिनमें से 46 प्रतिशत की एक्स-रे जांच भी की गई। इसके अलावा टीबी मुक्त ग्राम पंचायत पहल के तहत 2023 में 731, 2024 में 823 और 2025 में 1052 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया, जिनमें से कई को गोल्ड और सिल्वर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अभियान (2.0) के तहत प्रदेश के 5176 उच्च जोखिम वाले गाँव और शहरी वार्ड को कवर किया जाएगा। इसमें एआई आधारित मोबाइल एक्स-रे मशीनों और आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से व्यापक जाँच और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। स्थानीय सांसद, विधायक और पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने युवाओं से अपने शरीर का ध्यान रखने और ‘इट वेल, लिव वेल एंड थिंक वेल’ का पालन करने का आग्रह किया। विधायक हरीश जनारथा ने टीबी मरीजों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की सलाह दी।
मिशन निदेशक एनएचएम प्रदीप ठाकुर ने अभियान के महत्व पर प्रकाश डाला और उप-मिशन निदेशक डॉ राजेश गुलेरी ने प्रदेश के टीबी परीक्षण और उन्मूलन के आंकड़े साझा किए। इस अवसर पर विभिन्न कॉर्पोरेट संगठनों, टीबी चैम्पियंस और प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
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