हिमाचल प्रदेश के सरोग गांव में तालाब का जीर्णोद्धार, जल संरक्षण में अहम भूमिका

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हिमाचल प्रदेश के हरियाली से चारों ओर सरोग गांव में एक सूखा तालाब पिछले कुछ सालों से अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा था। तालाब अपनी दयनीय स्थिति को लेकर हर किसी के दिमाग में जगह तो बना ही चुका था, लेकिन इस अस्तित्व को जिंदा रखने के लिए कोई तालाब का साथ नहीं दे रहा था। ऐसे में एक वक्त पर स्थानीय लोगों ने पंचायत के साथ मिल कर प्रशासन तक तालाब की दयनीय स्थिति रख दी। इसके बाद धीरे-धीरे तालाब को पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासन तीव्रता से जुट गया।

तालाब का सूरते हाल ऐसा हो गया था कि गाद से पूरी तरह भर चुका था। जिस तालाब का पानी किसी जमाने में गांव वाले पीते थे, जिससे आसपास के अनेकों प्राकृतिक स्त्रोत रिर्चाज होते थे, अब वो पूरी तरह खत्म हो चुका था। एक बार देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जब शिमला दौरे पर आए थे, तो इस तालाब को देखने भी पहुंचे थे।

तब इस तालाब के अस्तित्व पर गर्व महसूस करते थे। लेकिन कोविड के बाद तालाब पूरी तरह गाद से भर गया। तालाब में पानी न के बराबर रह गया और जो मछलियां इस तालाब में थी वो भी मर चुकी थी। इस वजह से काफी गंदगी फैलना शुरू हो गई थी।

गांव व प्रशासन ने मिलकर चलाया सफाई अभियान, जीर्णोद्धार पर 60 लाख खर्च
फिर गांव वालों के साथ मिलकर प्रशासन ने तालाब का सफाई अभियान शुरू कर दिया। इस तालाब को साफ करने में कई महीने लग गए। मनरेगा के तहत 05 लाख रुपये खर्च करके तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हुआ।

इसके बाद एसजेवीएनएल ने 15 लाख रुपये सीएसआर के तहत मुहैया करवाए। लोक निर्माण विभाग ने करीब 10 लाख रुपये की लागत से तालाब के आसपास डंगा निर्माण करवाया। 5 लाख रुपये 15वें वित्त आयोग के तहत यहां पर खर्च किए। अभी तक इस तालाब के जीर्णोद्धार पर विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से करीब 60 लाख रुपये खर्च हो चुके है।

प्राकृतिक स्त्रोत हुए पुनर्जीवित
सरोग गांव के तालाब के पुनर्जीवित होने से लेकर केवल यहीं पानी एकत्रित नहीं हुआ है, बल्कि आसपास के लगते गांवों में भी इसके सकारात्मक परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं। सरोग से नीचे लगते गांव खलाल, ठाना, ढांग, दारो, जघोर सहित गांव में कई सालों से बंद पड़े प्राकृतिक स्त्रोत अब फिर पुर्नजीवित हो शुरू हो चुके है।

इन प्राकृतिक चश्मों में पानी फिर से आना शुरू हो गया। कुछ बागबानों के बगीचों में नए प्राकृतिक चश्में निकल आए है। अब ऐसे में स्थानीय लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है और पानी की किल्लत की समस्या भी दूर हो गई है।

 तालाब में 80 लाख लीटर पानी एकत्रित
इस वक्त पुर्नजीवित किए गए सरोग तालाब में 80 हजार लीटर पानी एकत्रित हो चुका है। इस तालाब की गहराई 15 फीट है। इस पानी का इस्तेमाल आगजनी के दौरान राहत कार्यों में किया जा सकता है। इसके अलावा अन्य उपयोगों के लिए पर्याप्त पानी यहां पर मौजूद है।

 ओपन एयर जिम भी किया स्थापित
इस तालाब के किनारे ओपन एयर जिम भी स्थापित किया गया है। जहां पर सुबह शाम गांव के  बच्चे, युवा, बुजुर्ग अक्सर आते है। एक तरफ जहां खूबसूरत तालाब का नजारा मिलता है तो वहीं दूसरी तरफ ओपन एयर जिम की फ्री सुविधा गांव वालों को मिल रही है।
सौंदर्यीकरण से निखर गया तालाब
सरोग गांव का तालाब जीर्णोद्धार के बाद किए गए सौंदर्यीकरण से पूरी तरह निखर चुका है। जहां दिन के उजाले में तालाब की सुंदरता मन को आकर्षित करती है। वहीं शाम को सोलर लाइटों की रोशनी से तालाब चमकता है। यहां पर आठ सोलर लाइट लगाई गई है। इसके अलावा तालाब के चारों ओर टाईलों से फुटपाथ बनाया गया है।

मनरेगा जल संरक्षण में निभा रहा अहम भूमिका
जल संरक्षण और जल संचयन हमेशा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का एक मुख्य हिस्सा रहा है। यह अधिनियम प्रति वर्ष 100 दिनों के सवेतन रोजगार की गारंटी देता है और इस प्रक्रिया में, सिंचाई चैनल, चेक डैम, सड़क निर्माण जैसे ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण को बढ़ावा दिया जाता है, जो गांव के समग्र विकास में योगदान देता है।

मनरेगा का लगभग 60 फीसदी फंड प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर खर्च किया जाने की प्राथमिकता रहती है। यानी खेती के तहत क्षेत्र और फसलों की उपज दोनों में सुधार करके किसानों की उच्च आय सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह भूमि की उत्पादकता में सुधार और पानी की उपलब्धता बढ़ाकर किया जाता है।

यह तालाब कई वर्षों पुराना रहा है। एक समय में ग्रामीण इस तालाब का पानी पीने के लिए भी इस्तेमाल करते थे, लेकिन कुछ वर्ष पहले गाद भर जाने के कारण तालाब सूख ही चुका था। स्थानीय लोगों के सहयोग से प्रशासन ने इस तालाब का जीर्णोद्धार किया है। अभी तालाब के समीप एक पुस्तकालय बनाने का प्रस्ताव भी है। इसको लेकर जल्द ही प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। इस तालाब के जीर्णोद्धार से आसपास के प्राकृतिक चश्में, जो सूख चुके थे, वह भी पुनर्जीवित हो चुके हैं।

हमने प्राकृतिक स्रोतों को जीवित करने के लिए सभी खंड अधिकारियों को निर्देश दिए है कि अपने-अपने क्षेत्र की पंचायतों में मनरेगा के तहत तालाबों को पुनर्जीवित करें। हमारी प्राथमिकता यह है कि तालाब का जीर्णोद्धार प्राकृतिक तरीके से हो। सीमेंट का इस्तेमाल कम से कम होना चाहिए। सरोग पंचायत में करीब 60 लाख रुपये की लागत से प्राकृतिक स्त्रोत का जीर्णोद्धार किया गया है। आज यहां 80 लाख लीटर पानी एकत्रित है। जल संरक्षण की दिशा में यह काफी महत्वपूर्ण है।

जिला प्रशासन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयासरत है। स्थानीय लोगों के सहयोग से प्रशासन पर्यावरण संरक्षण में सफलता हासिल कर रहा है। सरोग पंचायत के लोगों ने प्रशासन के साथ मिल कर तालाब का जीर्णोद्धार करके मिसाल पेश की है। इससे आसपास भूजल स्तर भी बढ़ गया है। इसी तरह अन्य गांव वासियों को अपने-अपने क्षेत्र में प्राकृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए कार्य करना चाहिए।


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