September 1, 2025

हिमाचल विश्वविद्यालय में शिक्षक संघ का उग्र प्रदर्शन, सरकार को चेतावनी

Date:

Share post:

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) के आह्वान पर कुलपति कार्यालय के बाहर एक विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षकों ने भाग लिया। यह सांकेतिक धरना प्रदेश सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीन कार्यप्रणाली के विरुद्ध किया गया। धरने को संबोधित करते हुए प्रो. संजय शर्मा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, यह कैसा व्यवस्था परिवर्तन है जिसमें सभी वर्गों के कर्मचारी – चाहे वो वोकेशनल टीचर हों, बिजली बोर्ड के कर्मचारी हों, सचिवालय कर्मी हों या शिक्षक – सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

यह प्रदेश की सच्चाई है कि कर्मचारी वर्ग आज प्रताड़ना झेल रहा है। डॉ. राजेश ने सरकार की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, सरकार एक ओर आर्थिक तंगी का हवाला देकर शिक्षकों की पदोन्नतियाँ रोक रही है, वहीं दूसरी ओर विधायकों और मंत्रियों की तनख्वाहें बढ़ाने के लिए तुरंत विधेयक पास कर रही है। यह सरासर अन्याय है। डॉ. जोगिंदर सकलानी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि, 2016 के सातवें वेतन आयोग के तहत लंबित एरियर और 11% डीए का तत्काल भुगतान किया जाए। जबकि उच्च प्रशासनिक पदों पर बैठे लोग अपने प्रमोशन और फायदे समय पर ले लेते हैं, शैक्षणिक वर्ग को दरकिनार किया जा रहा है।

संघ अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास ने बताया कि, शिक्षकों के लिए प्रस्तावित नए आवासीय भवनों का निर्माण वर्षों से रुका हुआ है, जबकि यूजीसी की ‘मेरु’ योजना के तहत पर्याप्त फंड उपलब्ध है। फिर भी निर्माण की नींव तक नहीं रखी गई। महासचिव अंकुश ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को राजनीति से ग्रस्त बताया। उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक प्राध्यापक को अपनी प्रमोशन के लिए भी सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। यदि मांगे नहीं मानी गईं तो जल्द ही विश्वविद्यालय में क्रमिक अनशन की शुरुआत की जाएगी। डॉ. अशोक बंसल ने बताया कि यूजीसी द्वारा ‘मेरु’ योजना के तहत मिले 100 करोड़ रुपये विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा खर्च नहीं किए जा रहे, जो संसाधनों की बर्बादी है।

प्रमुख मांगे:1. अधिनियम 2010 एवं 2018 के अंतर्गत समयबद्ध कैस प्रमोशन सुनिश्चित किया जाए।

2. सातवें वेतन आयोग (2016) के तहत लंबित वेतन वृद्धि और 11% डीए का शीघ्र भुगतान किया जाए।

3. शिक्षकों हेतु नए आवासीय भवनों का निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ किया जाए।

4. डीन रिसर्च के रिक्त पद को तत्काल भरा जाए।

5. विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए।

हपुटवा स्पष्ट करती है कि यदि इन मांगों की अवहेलना की गई तो भविष्य में आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा। यह धरना मात्र एक शुरुआत है। धरने में विश्वविद्याल के पूर्व कुलपति, डायरेक्टर ज्योति प्रकाश, ट्राइबल स्टडी चंद्रमोहन परशिरा, प्रो. हरि सिंह, प्रो. शशिकांत शर्मा , प्रो. विकास डोगरा, डॉ योगराज उपाध्यक्ष , डॉ अनिल कुमार , डॉ सनी अटवाल,डॉ सुनीत, डॉ मृदुला, डा. रितिका, डा नीलम, डा मृदुला, डॉ राम लाल, डा. डॉ राजेश,डॉ राकेश, डा. सुरेंद्र,डॉ योगराज, डा अनिल,  डॉ प्रीति कंवर, डॉ गौरव आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे।

https://keekli.in/shimla-mai-aapda-jagrukta-diwas-par-bhavya-ralli-ka-aayojan

Daily News Bulletin

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

मणिमहेश त्रासदी पर सरकार मौन: विपक्ष

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मणिमहेश यात्रा के दौरान हुए कुप्रबंधन और राहत कार्यों की लचर व्यवस्था को...

विकास, विनाश नहीं होना चाहिए: विक्रमादित्य

लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घणाहट्टी में आयोजित अंडर-14...

94 Water Schemes Restored in Chamba: Agnihotri

Deputy CM Mukesh Agnihotri expressed serious concern over the damage caused by heavy rainfall in several areas of...

CM Reviews Rain Havoc, Orders Swift Relief

CM Sukhu reviewed the state’s situation following continuous heavy rainfall and the resulting damage. Upon arriving at his...