पर्यावरण संरक्षण और सतत कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) ने इस्तेमाल की गई और खाली कांच की बोतलों की रीसाइक्लिंग के लिए बायबैक योजना की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है।
एचपीएमसी के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं, अधिकृत रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को खाली कांच की बोतलें वापस करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे कांच के कचरे का वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित होगा और योजना से जुड़े सभी हितधारकों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
योजना के तहत उपभोक्ताओं को अधिकृत रिटेलर्स के पास 200 मिलीलीटर की प्रत्येक खाली बोतल जमा करने पर एक रुपये तथा 600 मिलीलीटर की प्रत्येक बोतल पर दो रुपये दिए जाएंगे। वहीं, संग्रहण प्रक्रिया में उनकी भूमिका के आधार पर रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को प्रति बोतल चार रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा।
एचपीएमसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, खाली बोतलों का संग्रह अधिकृत रिटेलर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और एचपीएमसी कार्यालयों के माध्यम से किया जाएगा। इसके बाद इन्हें छंटाई और रीसाइक्लिंग के लिए जरोल स्थित एचपीएमसी के फल प्रसंस्करण संयंत्र भेजा जाएगा। संग्रहण और परिवहन की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए विशेष व्यवस्था भी की गई है।
निगम ने उपभोक्ताओं, रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। एचपीएमसी का कहना है कि यह पहल कांच के कचरे को कम करने, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सभी हितधारकों के लिए एक टिकाऊ एवं लाभकारी व्यवस्था स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



