नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने अपने विधानसभा कार्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान सरकार ने व्यवस्था और मर्यादाओं को पूरी तरह से तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि बजट सत्र में बजट की सही जानकारी नहीं मिल रही और राज्यपाल के अभिभाषण पर परंपरागत धन्यवाद प्रस्ताव और चर्चा की प्रक्रिया भी अस्त-व्यस्त हो गई है।
ठाकुर ने यूपीए सरकार पर हिमाचल के साथ भेदभाव का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हिमाचल को पहले कभी नहीं मिले सहयोग मिले हैं। उन्होंने बताया कि यूपीए के दो कार्यकाल में हिमाचल को केवल 18,000 करोड़ रुपये राजस्व घाटा अनुदान मिला, जबकि मोदी सरकार में यह राशि 78,000 करोड़ रुपये हो गई। मोदी सरकार ने हिमाचल को विशेष राज्य का दर्जा दिया, केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्य का अंशदान घटाकर 10% किया और रेलवे, नेशनल हाईवे, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत सभी क्षेत्रों में पर्याप्त सहयोग प्रदान किया।
ठाकुर ने वर्तमान सरकार पर वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती से पेश करने की बजाय राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नीति आयोग और अन्य केंद्रीय मंचों पर राजनीति को हिमाचल के हितों के ऊपर रखा गया, जिससे प्रदेश को नुकसान हुआ।
उन्होंने वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाया और कहा कि तीन साल में प्रदेश 45,000 करोड़ रुपये के लोन पर खड़ा हो गया, जबकि उनकी सरकार का लोन पेआउट 95% था। उन्होंने कोविड और आपदा प्रबंधन में सुक्खू सरकार की असफलताओं का भी जिक्र किया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की भलाई के लिए मुख्यमंत्री को ओछी राजनीति छोड़कर एक नेता की तरह काम करना चाहिए, न कि केवल बयानबाजी और बंदिशों में समय गंवाना चाहिए।



