हिमाचल प्रदेश में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर कड़ी आलोचना की है। विधानसभा में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सप्लीमेंट्री बजट ने मुख्यमंत्री सुक्खू के “फिस्कल प्रुडेंस, फिस्कल मैनेजमेंट और फिस्कल डिसिप्लिन” के दावों की पूरी धज्जियाँ उड़ाई हैं। ठाकुर ने यह भी कहा कि बजट का 70 प्रतिशत अनुपूरक होना सरकार की आर्थिक विफलता का प्रमाण है। उन्होंने सवाल उठाया कि अतिरिक्त खर्च का स्रोत क्या है और क्या इस खर्च से जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
ठाकुर ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष का कैपिटल एक्सपेंडिचर कुल बजट का मात्र 3.98% था, जिससे प्रदेश में विकास ठप होने का स्पष्ट संकेत मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस बार सप्लीमेंट्री बजट के दस्तावेज भी सार्वजनिक नहीं किए, ताकि अपनी नाकामी छुपाई जा सके।
साथ ही, विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर माफिया संरक्षण का आरोप भी लगाया। भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। जयराम ठाकुर ने सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र और धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि केवल 25 पेड़ों की अनुमति के बावजूद 300 से अधिक पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया और साक्ष्य मिटाने के लिए कुछ पेड़ों को सतलुज नदी में फेंक दिया गया तथा कई को जेसीबी से दफन किया गया।
ठाकुर ने कहा कि निजी भूमि के नाम पर संरक्षित वनों और सरकारी भूमि पर कटान और अवैध खनन हो रहा है, जिससे पर्यावरण और राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा और चेतावनी दी कि विपक्ष जनता और पर्यावरण के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे को विधानसभा से सड़क तक उठाता रहेगा।



