कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने राज्य सरकार की नीति की जानकारी देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कृषि रोड मैप और रबी एक्शन प्लान से किसानों को लाभकारी खेती की नई दिशा मिलेगी। कृषि क्षेत्र का जीडीपी में 14% योगदान बताते हुए उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के महत्व पर भी जोर दिया, जिनसे कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहे हैं।
प्रो. चंद्र कुमार भारतीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में राज्य कृषि रोड मैप और रबी एक्शन प्लान पर आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में बोल रहे थे। कार्यशाला का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के लिए 2025-2030 तक का कृषि रोडमैप तैयार करना था, जो प्राकृतिक खेती, कृषि-जलवायु विविधता, और राष्ट्रीय अभियानों से सामंजस्य स्थापित करने पर केंद्रित होगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसके लिए मवेशियों की भूमिका अहम है। उन्होंने कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया और इसके लिए अधिकारियों को देहरादून में प्रशिक्षण भेजने की जानकारी दी।
कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए दूध की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। इसके अतिरिक्त, ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट निर्माणाधीन है, जिसका संचालन डेयरी डेवलपमेंट अथॉरिटी करेगी। इस प्लांट में निर्मित उत्पादों पर हिमाचल ट्रेडमार्क होगा।
उन्होंने कृषि-जलवायु की पहचान करने और कीटनाशकों के न्यूनतम प्रयोग की आवश्यकता भी जताई ताकि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
इस कार्यशाला में तीन तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। पहले सत्र में विश्वविद्यालयों के दृष्टिकोण से कृषि रोड मैप और कार्य नीतियों पर चर्चा की गई। पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय और नौणी बागवानी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने राज्य की कृषि चुनौतियों और अवसरों पर विचार प्रस्तुत किए। दूसरे सत्र में आईसीएआर से जुड़े विभिन्न अनुसंधान संस्थानों ने कृषि रोड मैप के क्रियान्वयन और अनुसंधान-आधारित रणनीतियों पर अपने विचार व्यक्त किए। तीसरे सत्र में राज्य सरकार के दृष्टिकोण से कृषि रोड मैप और कार्य नीतियों पर चर्चा हुई, जिसमें कृषि विभाग, बागवानी विभाग, पशुपालन विभाग, और अन्य प्रमुख विभागों के निदेशकों ने भाग लिया।
कृषि मंत्री ने सभी विभागीय अधिकारियों से समन्वय और सहयोग की अपील की, ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया जा सके। सचिव कृषि एवं बागवानी सी. पाल रासु ने विभागीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और इस योजना में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यशाला में कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों और विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।



