पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार लगभग 3600 ग्राम पंचायतों में 1 फरवरी से प्रशासकों की नियुक्ति की जा रही है, जिससे पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाएगी। उन्होंने इसे लोकतंत्र और महात्मा गांधी के पंचायती राज व ग्राम स्वराज के सपने पर सीधा हमला बताया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रशासकों की नियुक्ति से पंचायत प्रधानों और चुने हुए प्रतिनिधियों की भूमिका केवल नाममात्र रह जाएगी। करीब 30 हजार से अधिक निर्वाचित जनप्रतिनिधि प्रभावहीन हो जाएंगे और प्रदेश की लाखों आबादी बिना स्थानीय प्रतिनिधित्व के सरकार द्वारा थोपे गए प्रशासकों के अधीन आ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जो सरकार गांधी जी के नाम पर अनशन और यात्राएं करती रही, वही सरकार उनके सपनों का गला घोंट रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा पिछले छह महीनों से चेतावनी दे रही थी कि सरकार जानबूझकर पंचायत चुनावों में देरी कर रही है, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्री बार-बार समय पर चुनाव कराने का आश्वासन देते रहे। अब 31 जनवरी को पंचायतों व स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति इस झूठ की पोल खोलती है।
उन्होंने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य चुनाव आयोग ने 30 जनवरी तक मतदाता सूची के प्रकाशन की समय-सीमा तय की थी, लेकिन तय अवधि बीतने के बावजूद सभी पंचायतों की वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं की गई। कोर्ट के आदेशों के बावजूद सरकार की यह लापरवाही और हठधर्मिता गंभीर सवाल खड़े करती है।
जयराम ठाकुर ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए कहा कि राज्य में फिल्मी स्टाइल में दिनदहाड़े गोलियां चल रही हैं। बद्दी में एसपी आवास से कुछ किलोमीटर की दूरी पर फायरिंग की घटना इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह कोई एक घटना नहीं बल्कि रोज़मर्रा का हाल बन चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जनता की सुरक्षा के बजाय माफिया को संरक्षण देने में व्यस्त है। शराब, खनन, वन, स्क्रैप, इंडस्ट्री और नशा माफिया सरकार के संरक्षण में न केवल पनप रहे हैं बल्कि खुलेआम फल-फूल रहे हैं। जयराम ठाकुर ने चेतावनी दी कि माफिया को संरक्षण देना प्रदेश की संस्कृति नहीं रही है और इससे सरकार की साख पर गहरा दाग लगेगा।


