अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आज गेयटी थियेटर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर किया।
अपने संबोधन में उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि महिलाओं में हर क्षेत्र में इतिहास रचने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ समाज में बड़ा बदलाव आया है और आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। राष्ट्र और विश्व के विकास में बेटियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिला लाहौल-स्पीति में प्रशासनिक सेवाओं में महिलाएं कार्यरत हैं और उनके कार्य की सराहना हर जगह हो रही है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में शिक्षा की अहम भूमिका है। हाल ही में न्यायाधीशों के प्रशिक्षण के लिए आए बैच में कुल 18 में से 17 महिलाएं हैं, जो समाज में बढ़ते महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब सैनिक स्कूलों में भी लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। अभिभावकों को अपनी बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और करियर को लेकर सजग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की इच्छाशक्ति मजबूत होती है और तकनीक के इस दौर में उन्हें नए अवसरों की तलाश कर आत्मनिर्भर बनना होगा।
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष संतोष शर्मा ने कहा कि नारी केवल घर की धुरी ही नहीं, बल्कि आज वह हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही है। चाहे कल्पना चावला का साहस हो या मैरी कॉम का जज्बा, हर रूप में महिला शक्ति प्रेरणा का स्रोत है।
फाइन आर्ट्स कॉलेज की प्राचार्य डॉ. कामायनी बिष्ट ने कहा कि आज महिलाएं अपनी प्रतिभा और मेहनत से हर क्षेत्र में पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों का पालन-पोषण लड़का और लड़की में भेदभाव किए बिना समान रूप से होना चाहिए। जब एक महिला शिक्षित और सशक्त होती है तो उसका लाभ पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र को मिलता है।
इस अवसर पर उपायुक्त ने हस्ताक्षर अभियान में भी भाग लिया। कार्यक्रम में एडीएम लॉ एंड ऑर्डर पंकज शर्मा, बाल कल्याण समिति की सदस्य किरण ओक्टा, उषा राठौर, जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल सहित बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, खेल और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं, खिलाड़ियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।



