मातृवंदना के मंच से संस्कृति का संदेश

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मातृवंदना संस्थान, शिमला द्वारा ऐतिहासिक गेयटी थिएटर के गॉथिक हॉल में “मातृवंदना पत्रिका विशेषांक एवं दिनदर्शिका विमोचन” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजकुमार वर्मा (संस्थापक सदस्य, साई एटर्नल फाउंडेशन) तथा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. उमेश मौदगिल मंच पर मौजूद रहे।

मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय प्रचार टोली सदस्य प्रेम कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि अनेक आक्रमणों के बावजूद भारत की आंतरिक सांस्कृतिक चेतना ने हिंदुत्व को कभी कमजोर नहीं होने दिया। उन्होंने भारतीय संस्कृति को सनातन बताते हुए कहा कि इसकी जड़ें इतनी मजबूत हैं कि इसकी चेतना सदैव जीवंत बनी रही है।

मीडिया पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े सकारात्मक समाचारों को अपेक्षाकृत कम स्थान मिलता है, जबकि समाज को विभाजित करने वाली खबरों को अधिक महत्व दिया जाता है। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया की घटती विश्वसनीयता पर भी चिंता व्यक्त की।

मातृवंदना पत्रिका की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इसका पहला अंक अप्रैल 1995 में मंडी जिला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैय्या’ द्वारा विमोचित किया गया था, जबकि 1997 से इसका नियमित प्रकाशन शिमला से प्रारंभ हुआ। आज यह पत्रिका हिमाचल प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों सहित 11 हजार से अधिक गांवों तक पहुंचकर समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताया कि यहां इसकी सदस्यता सबसे अधिक है।

मुख्य अतिथि राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने अपने संबोधन में “पंच परिवर्तन” पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा मातृवंदना पत्रिका ऐप का शुभारंभ किया, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक भी पत्रिका की पहुंच और अधिक सशक्त होगी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश को नशामुक्त बनाने का आह्वान भी किया। इस दौरान उन्होंने “मातृवंदना” के विशेषांक का औपचारिक विमोचन करते हुए इसे राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रधर्म की भावना जागृत करने वाली पत्रिका बताया।

कार्यक्रम में पत्रिका के पूर्व संस्थापक संपादक एवं संस्कृत विद्वान डॉ. दयानंद शर्मा को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर पत्रिका की संपादक डॉ. कर्म सिंह ने बताया कि “मातृवंदना” मासिक पत्रिका का शुभारंभ जुलाई 1992 में हुआ था। उन्होंने विशेषांक “पांच संकल्प से समाज परिवर्तन” के माध्यम से पत्रिका के इतिहास और विकास यात्रा की विस्तृत जानकारी भी प्रस्तुत की।

IIAS Hosts Talk on Ambedkar’s Vision

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