पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ में विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से सक्रिय भागीदारी निभाने का पुरजोर आह्वान किया है। शिमला स्थित कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल, चेल्सी के वार्षिक समारोह ‘ओशन ओडैसी’ में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को नशे के दलदल से बचाना केवल पुलिस का ही नहीं, बल्कि परिवारों, शिक्षण संस्थानों और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रदेश के नौनिहालों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने का एक बड़ा जन आंदोलन है।डीजीपी ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे इस मुहिम के सक्रिय दूत बनकर इसका संदेश अपने दोस्तों और परिवारों तक पहुंचाएं। साथ ही, उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों को चिट्टे के बढ़ते खतरे के प्रति आगाह करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ इस लड़ाई की नींव घर और विद्यालय से ही मजबूत होनी चाहिए। इसके लिए बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना, शुरुआती संकेतों को पहचानना और समय रहते सही कदम उठाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से विशेष रूप से अपील की कि वे अपने बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं, उनकी चिंताओं को ध्यान से सुनें और एक ऐसा भरोसेमंद माहौल तैयार करें जहां बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें।
समारोह की थीम ‘ओशन ओडैसी’ से प्रेरणा लेते हुए डीजीपी ने विद्यार्थियों को जिज्ञासा, साहस और संवेदनशीलता के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि असली सफलता केवल किताबों के अंकों या बड़े पदों से नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान बनने से तय होती है। इस दौरान उन्होंने स्कूल के वार्षिक उत्सव में बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, बैंड प्रदर्शन, कराटे और स्केटिंग की जमकर सराहना की। कार्यक्रम के अंत में हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा एक विशेष जागरूकता शिविर भी लगाया गया, जिसमें आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS-112) की जानकारी दी गई। इस दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि त्वरित कार्यप्रणाली के दम पर आपातकालीन प्रतिक्रिया समय की राष्ट्रीय रैंकिंग में हिमाचल पुलिस ने 34वें स्थान से छलांग लगाकर देश में पहला स्थान हासिल किया है।


