पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर जनता और स्थानीय निकायों को लगातार गुमराह किया जा रहा है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार समय पर चुनाव न करवा कर ग्रामीण और शहरी विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
ठाकुर ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 9 जनवरी को 30 अप्रैल तक चुनाव संपन्न करने का आदेश दिया था, लेकिन कांग्रेस सरकार इसे टालने की रणनीति बना रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार को चुनाव नहीं करवाने थे, तो चुनाव की तैयारी का स्वांग क्यों रचा गया और न्यायालय के फैसले पर अवांछनीय टिप्पणी क्यों की गई।
नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि बिना निर्वाचित स्थानीय निकायों के केंद्र द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ सही समय पर जनता तक नहीं पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा के 1.72 लाख प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं और 655 पंचायतों में एक भी व्यक्ति को रोजगार नहीं मिला। ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार चुनाव पर होने वाले खर्च को लेकर चिंता जताती है, लेकिन मुकदमे लड़ने में करोड़ों खर्च कर रही है।
ठाकुर ने कहा कि आपदा प्रबंधन कानून के नाम पर पंचायत चुनाव रोकने की कोशिश की जा रही है, जबकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य सही ढंग से नहीं किए जा रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि कानून लागू होने के बाद प्रदेश में आपदा राहत की समीक्षा के लिए कितने दौरे किए गए।
ठाकुर ने सरकार पर लोकतंत्र और संविधान की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों से दूर होती जा रही है।



