भीम सिंह, गांव देहरा हटवाड़, जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश।

पिता हूं तेरी यादों में घुलता हूं
तेरा बचपन, तेरी बातें कहां भूलता हूं ।

तू तो चली गई मुझे छोड़ कर
दिल मेरा तोड़ कर
मगर मैं जाऊं तो कहां जाऊं
तुझे अब कहां से ढूँढ कर लाऊं ।

यह कैसी सजा है मेंने पाई
याद करते आंखें भर आई
किसी के ऐसे दुख को
यह दुनिया कहां समझती है भाई।

कोई जीता है तो जीये
कोई मरता है तो मरे
किसी की परवाह भला
यह दुनिया कब करे।

तू दुख में रही, दुख में गई
यह दर्द मुझे हरदम रहता है
जितना तूनें सहा था जीवन में
उतना भला कौन सहता है।

हम गुनाहगार हैं तेरे
कोई कुछ कहे या न कहे
तेरे दुख को हम कभी नहीं समझे
समझे भी तो हल्के में लेते रहे।

 

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