मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को ग्रामीण विकास और किसान समृद्धि का प्रमुख आधार बना रही है। किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और सुरक्षित खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं।
हिमाचल देश का पहला राज्य है, जिसने प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू किया है। वर्तमान में प्राकृतिक गेहूं 80 रुपये, मक्की 50 रुपये, कच्ची हल्दी 150 रुपये, पांगी की जौ 80 रुपये और अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी जा रही है।
सरकारी प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव किसानों की भागीदारी में भी दिखाई दे रहा है। इस रबी सीजन में 1,891 किसानों से 2,679.89 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं खरीदा गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।
जनजातीय क्षेत्र के प्राकृतिक उत्पादों को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से चंबा के पांगी उप-मंडल को प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उप-मंडल घोषित किया गया है। वहीं, बड़ा भंगाल को प्राकृतिक खेती पंचायत के रूप में विकसित करने और यहां के राजमाह को जीआई टैग दिलाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
प्रदेश में वर्तमान में 2.56 लाख से अधिक किसान लगभग 44,785 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्राकृतिक उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए कृषि विभाग में अलग मार्केटिंग विंग स्थापित करने की प्रक्रिया भी जारी है।
प्राकृतिक उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए हमीरपुर में 8.64 करोड़ रुपये की लागत से राज्य अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई है। यह आधुनिक प्रयोगशाला प्राकृतिक उत्पादों और बीजों की वैज्ञानिक जांच कर किसानों और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद सुनिश्चित करेगी।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन का स्वरूप देकर किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और हिमाचल को प्राकृतिक कृषि के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।



