उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने निर्देश दिए कि आम लोगों और बच्चों तक केवल उच्च गुणवत्ता वाली खाद्य वस्तुएं ही पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार उचित भंडारण न होने से खाद्य सामग्री खराब हो जाती है, इसलिए डिपो धारक, आंगनवाड़ी और मिड-डे मील कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करें कि खराब खाद्य वस्तुएं वितरित न हों और ऐसी स्थिति में तुरंत विभाग को सूचित किया जाए।
उपायुक्त आज यहां जिला स्तरीय सार्वजनिक वितरण प्रणाली समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, जिसमें त्रैमासिक कार्यों की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि उचित मूल्य की दुकानों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से लोगों और बच्चों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग को निर्देश दिए गए कि दुकानों में खाद्य वस्तुओं का सही भंडारण हो और राशन की आपूर्ति निरंतर बनी रहे। खराब खाद्य सामग्री की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि जिले में 627 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से राशन वितरित किया जा रहा है, जिनमें सहकारी सभाएं, व्यक्तिगत डिपो, महिला मंडल, ग्राम पंचायत और खाद्य आपूर्ति निगम की दुकानें शामिल हैं। दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के दौरान विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को बड़ी मात्रा में चीनी, चावल, गेहूं का आटा, दालें, आयोडीन युक्त नमक और 5 लाख लीटर से अधिक खाद्य तेल वितरित किया गया।
इस अवधि में 1362 निरीक्षण किए गए, जिनमें 5 दुकानों में अनियमितताएं पाई गईं और जुर्माना लगाया गया। होटल-ढाबों में घरेलू गैस सिलेंडर के उपयोग पर भी कार्रवाई की गई। इसके अलावा प्राधिकरण का नवीनीकरण न कराने वाली दुकानों से प्रतिभूति राशि जब्त कर सरकारी कोष में जमा करवाई गई।
बैठक में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 12 नई उचित मूल्य की दुकानों खोलने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
इसके बाद जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि जिले में इस अधिनियम के तहत 84,636 परिवारों को कवर करने का लक्ष्य है, जिनमें से अब तक 66,230 परिवारों का चयन किया जा चुका है।
अंत्योदय अन्न योजना और अन्य श्रेणियों के तहत पात्र परिवारों को निर्धारित मात्रा में चावल और गेहूं का आटा निःशुल्क या रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि जरूरतमंद परिवारों को पर्याप्त खाद्यान्न मिल सके।



