February 23, 2026

सदी की चमक: लाइट एंड साउंड से सजी सेंट थॉमस की कहानी

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सेंट थॉमस स्कूल, शिमला ने अपने 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक अत्यंत भव्य और भावनात्मक “नव नभ निर्माण” लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया। यह आयोजन स्कूल परिसर में किया गया, जिसमें विद्यालय के एक सदी के गौरवशाली इतिहास को प्रकाश और ध्वनि के माध्यम से रोचक एवं कलात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया थे, जबकि चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) के अमृतसर डायोसिस के बिशप, राइट रेवरेंड मनोज चरण इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस शो ने न केवल सेंट थॉमस स्कूल के एक शताब्दी लंबे सफर को उजागर किया, बल्कि यह एक नई सोच और उन्नत भविष्य की ओर विद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बना।

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लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से दर्शकों को 1912 में एक छोटे से पैरिश प्राइमरी स्कूल के रूप में शुरू हुए सेंट थॉमस स्कूल की यात्रा पर ले जाया गया। प्रसिद्ध शिक्षाविद् मिस हेलेन जेरवुड द्वारा शुरू किया गया यह संस्थान आज एक प्रतिष्ठित सीबीएसई से संबद्ध सह-शिक्षा विद्यालय बन चुका है।

शो की पटकथा और निर्देशन नंदिनी बनर्जी ने किया, जबकि लाइट एंड साउंड का संचालन शुद्धो बनर्जी ने किया। इस रचनात्मक प्रस्तुति ने स्कूल की उपलब्धियों, शिक्षा प्रणाली, और समाज के प्रति इसके योगदान को बेहद प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।

मुख्य अतिथि कुलदीप सिंह पठानिया ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय की यह यात्रा शिक्षा, सेवा और मूल्यों की मिसाल रही है। उन्होंने कहा, “यह विद्यालय अपने गौरवमयी अतीत, समर्पित शिक्षकों, होनहार छात्रों और दूरदर्शी नेतृत्व के चलते हिमाचल ही नहीं, पूरे देश में एक प्रतिष्ठित नाम बन चुका है।”

उन्होंने इस बात की सराहना की कि सेंट थॉमस स्कूल की शुरुआत बालिकाओं को शिक्षा देने के लिए हुई थी, और आज यह महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण बन चुका है। उन्होंने बच्चों को भविष्य की ऊँचाइयों को छूने के लिए प्रेरित किया और शिक्षकों को उनके योगदान के लिए बधाई दी।

बिशप मनोज चरण ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सेंट थॉमस स्कूल सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता और सेवा भावना का स्तंभ है।

विद्यालय की प्रधानाचार्या विधुप्रिया चक्रवर्ती, जो वर्ष 2007 से इस संस्था की सेवा में हैं, ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा, “हमारी यह शताब्दी यात्रा न केवल अतीत का उत्सव है, बल्कि भविष्य के लिए हमारी नई प्रतिबद्धता है। सेंट थॉमस स्कूल ने हमेशा समावेशी, नैतिक और समग्र शिक्षा को अपनाया है।”

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाले वर्षों में भी स्कूल इसी समर्पण के साथ नवीन ऊँचाइयों को छूता रहेगा और ‘नव नभ निर्माण’ की थीम बच्चों को नई सोच, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण से युक्त करेगी।

सेंट थॉमस चर्च की स्थापना 1912 में हुई थी और इसका भवन तत्कालीन वाइसरॉय लॉर्ड हार्डिंग द्वारा उद्घाटित किया गया था। चर्च भवन का वास्तुशिल्प हर्बर्ट वालर द्वारा डिज़ाइन किया गया था, जिसमें विशेष पत्थरों का प्रयोग हुआ। वर्ष 1924 में यह स्कूल पंजाब शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होकर एक उच्च विद्यालय के रूप में उभरा और बाद में 1971 में हिमाचल बोर्ड तथा 2009 में सीबीएसई से जुड़ गया।

इस ऐतिहासिक आयोजन में सीएनआई अमृतसर डायोसिस के कई गणमान्य व्यक्ति, स्थानीय प्रशासन से अधिकारीगण और शिक्षा क्षेत्र के प्रमुख शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में श्रोताओं को एक ऐसा अनुभव मिला जो उन्हें न केवल विद्यालय के अतीत से जोड़ता है, बल्कि भविष्य की ओर भी प्रेरित करता है।

नव नभ निर्माण केवल एक शो नहीं, बल्कि सेंट थॉमस स्कूल की नई उड़ान की शुरुआत है—एक ऐसा प्रयास जो शिक्षा के नए आयामों को छूने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करता रहेगा।

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