सरकारी नहीं, सिर्फ प्राइवेट डॉक्टर उपभोक्ता कानून के दायरे में आते हैं

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हिमाचल प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की सदस्य और प्रदेश हाईकोर्ट की सीनियर एडवोकेट सुनीता शर्मा ने कहा है कि प्राइवेट डॉक्टरों की सेवाएं उपभोक्ता कानून के दायरे में आती हैं। हिमाचल प्रदेश के 4 जिलों – शिमला, मंडी, ऊना और कांगड़ा में जिला उपभोक्ता आयोग गठित किए गए हैं। हर जिला आयोग 3-3 जिलों के उपभोक्ताओं की शिकायतों का निपटारा करता है। सुनीता शर्मा उमंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित वेबिनार में “उपभोक्ताओं के कानूनी अधिकार” विषय पर विशेषज्ञ वक्ता थीं। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में गूगल मीट पर मानवाधिकार जागरूकता को लेकर उमंग फाउंडेशन का यह 28वां साप्ताहिक वेबीनार था। इसमें हिमाचल प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के युवाओं ने भी हिस्सा लिया। उपभोक्ताओं के अधिकारों के साथ ही उन्होंने शिकायत निवारण आयोग की कार्यप्रणाली के बारे में भी बताया।  उन्होंने बताया की उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 में काफी खामियां थीं। इसलिए वर्ष 2020 में नया कानून लागू किया गया। अब उपभोक्ताओं को किसी उत्पाद अथवा सेवाओं की गुणवत्ता एवं अन्य मामलों को लेकर शिकायतों का समाधान पाना आसान हो गया है।

उन्होंने कहा कि शिमला, कांगड़ा,ऊना और मंडी जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग कार्य कर रहे हैं। हर जिला आयोग तीन- तीन जिलों की समस्याओं का निवारण करता है। सुनीता शर्मा ने कहा कि जिला आयोग में 50 लाख रुपए तक की शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं, जबकि इससे अधिक और दो करोड़ रुपए तक की शिकायतें राजा युग में और उससे अधिक राशि के मामले राष्ट्रीय आयोग में दायर किए जा सकते हैं। उनका कहना था कि ई-फाइलिंग के जरिए भी शिकायत दायर की जा सकती है। कोई भी उपभोक्ता किसी उत्पाद अथवा सेवा के बारे में शिकायत स्वयं फाइल कर सकता है। इसमें वकील लेने की अनिवार्यता नहीं है। उपभोक्ता संगठन भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत निवारण के लिए आदर्श समय 3 महीने का होता है। यदि किसी प्रयोगशाला से कोई परीक्षण कराना हो तो यह समय 5 महीने होता है। नए कानून में उपभोक्ता और प्रतिवादी के बीच में मध्यस्थता का प्रावधान भी है ताकि कोर्ट के बाहर मामले सुलझ जाएं। उपभोक्ता मामलों की शिकायत के लिए जिला अथवा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता भी ली जा सकती है।

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