जनगणना-2027 के प्रथम चरण (हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस) की प्रगति को लेकर जिला शिमला में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। प्रधान जनगणना अधिकारी की अध्यक्षता में चार्ज अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त अनुपम कश्यप ने की।
बैठक में बताया गया कि हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) का कार्य 11 जुलाई, 2026 तक पूरा किया जाना है। इसके बाद एकत्रित आंकड़ों की जांच, परीक्षण और सत्यापन प्रक्रिया 15 जुलाई, 2026 तक पूरी की जाएगी। उपायुक्त ने सभी चार्ज अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कार्य की नियमित निगरानी करने और किसी भी त्रुटि को समय रहते सुधारने के निर्देश दिए।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जनगणना के दौरान जुटाए जा रहे आंकड़ों की सटीकता, गुणवत्ता, गोपनीयता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्धारित मानकों के अनुसार डेटा तैयार किया जाए और किसी भी तरह की विसंगति मिलने पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई की जाए।
बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण संकेतकों के सत्यापन पर विशेष चर्चा की गई। इनमें खुले में शौच की स्थिति, रात्रिकालीन मानव मल निष्कासन, एलपीजी उपलब्ध होने के बावजूद अन्य ईंधनों के उपयोग, पेयजल की स्थिति, घरों के आसपास जलस्रोतों की उपलब्धता, प्रकाश व्यवस्था, बिजली सुविधा, इंटरनेट एवं टेलीफोन सेवाओं जैसी जानकारियों का सही संकलन शामिल है। इन सभी बिंदुओं की जांच की जिम्मेदारी संबंधित चार्ज अधिकारियों को सौंपी गई।
उपायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी क्षेत्रों को पूरी तरह कवर करते हुए आंकड़ों को समय पर प्रस्तुत किया जाए। चार्ज अधिकारी और चार्ज क्लर्क नियमित रूप से फील्ड निरीक्षण करें तथा गलत या असामान्य जानकारी मिलने पर उसे तत्काल दुरुस्त करें। उन्होंने डेटा सुरक्षा बनाए रखने, हाउस लिस्टिंग आंकड़ों की वर्ष 2011 की जनगणना से तुलना करने और स्कैन किए गए ले-आउट मानचित्र अपलोड करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में जनगणना-2027 के दूसरे चरण (जनसंख्या गणना) की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। हिमपात प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष तैयारी करने, नए एन्यूमरेशन ब्लॉक निर्धारित करने और प्रथम चरण के बाद आवश्यकतानुसार संक्षिप्त गृह सूची तैयार करने पर जोर दिया गया।
उपायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को पूरी जिम्मेदारी, पारदर्शिता और गंभीरता के साथ पूरा किया जाए, ताकि भविष्य की योजनाओं के लिए उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकें।



