मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के तहत जिला शिमला में निर्माणाधीन आवासों की प्रगति की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने निर्देश दिए हैं कि सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) लाभार्थियों के घरों के निर्माण कार्य का हर महीने निरीक्षण करेंगे और समय-समय पर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजना की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने कहा कि जब तक आवास निर्माण पूरा नहीं हो जाता, सीडीपीओ स्वयं मौके पर जाकर प्रगति का जायजा लेंगे। इसके अलावा फील्ड स्टाफ भी अपने क्षेत्रों में आने वाले सभी लाभार्थियों के निर्माण कार्य की नियमित रिपोर्ट तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार ने बेसहारा और निराश्रित बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा देकर उनके सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी उठाई है। ऐसे में सभी संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उपायुक्त ने बताया कि योजना के तहत जिला शिमला में पात्र अनाथ एवं निराश्रित बच्चों को घर निर्माण के लिए तीन बीघा जमीन और 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये सीधे बैंक खाते में जारी किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि जिला शिमला में अब तक 29 लाभार्थियों के आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 5 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 24 आवासों का कार्य प्रगति पर है। समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त अनुपम कश्यप ने स्वयं कुछ लाभार्थियों से फोन पर बातचीत कर निर्माण कार्य की स्थिति और विभागीय सहायता की जानकारी ली। उन्होंने अक्षित और शानित से बातचीत कर आवास निर्माण में आ रही समस्याओं के बारे में पूछा और कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के तहत स्वीकृत सभी आवासों का निर्माण निर्धारित समय सीमा में पूरा करवाना सुनिश्चित करें, ताकि लाभार्थियों को जल्द से जल्द सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध हो सके।



