पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेश किए गए चौथे बजट पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह प्रदेश के इतिहास का सबसे नीरस और जनविरोधी बजट है। उन्होंने दावा किया कि जनता तो छोड़िए, कांग्रेस के अपने नेता भी इस बजट से उत्साहित नहीं हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार ने सत्ता में आते ही पिछले दौर में बनाए गए 2000 से अधिक संस्थानों को समाप्त कर दिया और अब जनता से योजनाओं और कर्मचारियों की सैलरी छीनने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री के अहंकारी रवैये की भी आलोचना की और कहा कि बजट तैयार करने वाले अधिकारियों की मेहनत को नजरअंदाज किया गया, जबकि सारी वाहवाही मुख्यमंत्री खुद लेने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने बजट में किए गए विकास के दावों को केंद्र सरकार की योजनाओं से जोड़ा बताया और सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री का इसमें वास्तविक योगदान क्या है। ठाकुर ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सुक्खू सरकार ने पहले सरकारी खजाना अपने “मित्रों” पर लुटाया और अब जब कोष खाली हो गया है, तो कर्मचारियों की सैलरी डेफर करने जैसे तानाशाही कदम उठाए जा रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने बताया कि बजट में केवल केंद्रीय योजनाओं का नाम बदलकर उन्हें नया रूप देने की कोशिश की गई, लेकिन धरातल पर इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजली और पानी के बढ़ते बिल और सरकारी दूध की कम खरीद ने आम जनता और पशुपालकों में भारी रोष पैदा कर दिया है। उनका निष्कर्ष था कि बजट पूरी तरह चालाकी भरा और खोखला है, और मुख्यमंत्री को अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सदन में मजाक का सहारा लेना पड़ा।



