पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी की बढ़ती फीस और हिमकेयर कवरेज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी शुरू होने के सिर्फ 4 महीने में फीस लगभग दोगुनी कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, अटल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, चमियाना में जनरल वार्ड के मरीजों की सर्जरी पहले 30,000 रुपए में होती थी, जिसे बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया गया है, जबकि स्पेशल वार्ड के मरीजों से अब 80,000 रुपए लिए जा रहे हैं। वहीं, आईजीएमसी शिमला में जनरल वार्ड के मरीजों से 30,000 और स्पेशल वार्ड के मरीजों से 50,000 रुपए लिए जा रहे हैं। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि एक ही शहर के सरकारी अस्पतालों में फीस में असमानता क्यों है और क्या यह वित्तीय नियमों के अनुकूल है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि हर रोबोटिक सर्जरी मशीन के साथ लगभग 200 सर्जरी के लिए कंज्यूमेबल आइटम्स खरीदे गए थे, जिनमें ज्यादातर आइटम एक बार ही इस्तेमाल होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, हर सर्जरी में कंज्यूमेबल्स का खर्च 1–1.5 लाख रुपए तक होता है। ठाकुर ने पूछा कि जब मशीन के साथ आए कंज्यूमेबल्स खत्म हो जाएंगे, तब सर्जरी की कीमत क्या स्थिर रहेगी या बढ़ जाएगी।
इसके अलावा, जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले ही यह घोषणा कर चुके थे कि रोबोटिक सर्जरी हिमकेयर के तहत होगी, लेकिन 4 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किसी शासकीय पत्र के माध्यम से इसका लाभ जनता तक नहीं पहुंचा है। प्रदेश की 90% आबादी जो हिमकेयर या आयुष्मान योजना में आती है, उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेशभर में अस्पतालों को दवाइयां और सर्जिकल आइटम्स समय पर नहीं मिल रहे, क्योंकि वेंडर्स को हिमकेयर के तहत भुगतान नहीं किया जा रहा है।
ठाकुर ने मुख्यमंत्री से यह स्पष्ट करने की मांग की कि भविष्य में रोबोटिक सर्जरी के कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति और भुगतान के लिए क्या प्रावधान होंगे, ताकि फीस और इलाज के संबंध में पारदर्शिता बनी रहे।



