February 4, 2026

Tag: टेढ़ी मेढ़ी

spot_imgspot_img

लकीरें: एक कविता

डॉ. कमल के. प्यासा खड़ी पड़ी,आड़ी तिरछी,टेढ़ी मेढ़ी,आधी अधूरी,इधर उधर,यहां वहां,कहीं भी हों लकीरें। लकीरें,बांटती हैं,काटती हैं,तोड़ती (मिटाती),फोड़ती (गंवाती),दरारें डालती हैं! लकीरें कलम की, तलवार की,...

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla