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डॉo कमल केo प्यासा

नदी: डॉ. कमल के. प्यासा

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नदी हूं मैंमुझे बस स्वछंद हीबहने दो,मस्ती में इधर उधरखूब मचलने दो,जन जन की प्यास बुझाने दो,मत रोकोजैसे तैसे बस जाने दो ! बांधने पर मैंकैसे आगे बढ़ पाऊं गीवरना...