August 31, 2025

Tag: सफर

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आदमी : आदमी का रूपांतरण

पत्थरों के इस शहर में,मिट्टी गारा धूल फांकते फांकतेभूख इतनी बड़ी,हरियाली गुल हो गई,जंगल के जंगल निगल गया आदमी पत्थरों के कारोबार में,पत्थरों को तोड़ते...

हाथ : डाॅ० कमल के॰ प्यासा

प्रेषक : डॉ. कमल के . प्यासा कटे फटे काले काले,मैले कुचैलेनन्हें नन्हें हाथ !पेट की खातिर जीतेपेट की खातिर मरते।जिधर चाहो लग जाते,गंदगी,मैला,गंध...

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