त्रिभाषीय सूक्ति-संग्रह “The Quest for Wisdom – प्रज्ञाया: अन्वेषणम्” का द्वितीय संस्करण भारतीय नौसेना प्रमुख Dinesh Kumar Tripathi के करकमलों से लोकार्पित हुआ। इस अवसर ने कृति को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट प्रतिष्ठा प्रदान की।
यह अद्वितीय ग्रंथ संस्कृत, हिंदी और अंग्रेज़ी—तीनों भाषाओं में प्रकाशित किया गया है। इसमें प्राचीन संस्कृत वाङ्मय से चयनित सूक्तियाँ मूल रूप में प्रस्तुत हैं, जिनके साथ सरल हिंदी एवं अंग्रेज़ी अनुवाद भी संलग्न किए गए हैं। विविध प्राचीन ग्रंथों से संकलित ये प्रेरक सूत्र पुस्तक को विचार-संपन्न और सारगर्भित स्वरूप प्रदान करते हैं।
पुस्तक का मूल उद्देश्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना और पाठकों के चिंतन को उच्चतर आयाम देना है। संस्कृत का प्रारंभिक ज्ञान रखने वाले पाठकों के लिए हिंदी और अंग्रेज़ी अनुवाद इसे सहज एवं ग्राह्य बनाते हैं। त्रिभाषीय प्रस्तुति के कारण यह कृति व्यापक पाठक-वर्ग को आकर्षित करने में सक्षम मानी जा रही है।
इस पुस्तक के लेखक कामेश्वर शर्मा, हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की अर्की तहसील अंतर्गत ग्राम बंबेली (ग्राम पंचायत सेवड़ा-चंडी) के निवासी हैं। वे पिछले 15 वर्षों से Sainik School Rewa (रक्षा मंत्रालय) में संस्कृत शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं तथा एनसीसी में प्रथम अधिकारी का दायित्व भी निभा रहे हैं।
पूर्व में उनकी उत्कृष्ट कार्यकुशलता और समर्पण के लिए उन्हें Flag Officer Commanding-in-Chief द्वारा प्रशंसा-पत्र (Commendation Card) से सम्मानित किया जा चुका है।
यह कृति न केवल संस्कृत साहित्य के प्रति अभिरुचि को प्रोत्साहित करती है, बल्कि आधुनिक युग में भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्स्मरण और प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल के रूप में भी स्थापित हो रही है।



