भारत विभाजन को मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक करार देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि देश को आजादी की भारी कीमत चुकानी पड़ी। 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर पाकिस्तान का गठन उस समय के कांग्रेस नेतृत्व की बहुत बड़ी राजनीतिक विफलता का परिणाम था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दिन को स्मृति दिवस के रूप में मनाने की पहल को साहसिक बताया और स्पष्ट किया कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य पुरानी बातों को तूल देना नहीं, बल्कि अतीत की भूलों से सीख लेकर उन्हें भविष्य में न दोहराना है।
विभाजन के दर्दनाक परिणामों को रेखांकित करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि इस दौरान डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा और लाखों मासूमों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि विभाजन केवल जमीन पर खींची गई एक सीमा रेखा नहीं थी, बल्कि यह हमारी साझी संस्कृति, सामाजिक ताने-बाने और मानवीय संवेदनाओं पर लगा एक ऐसा घाव था जिसके निशान आज भी कायम हैं। ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ उन सभी पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ समाज से वैमनस्य के जहर को खत्म कर राष्ट्रीय एकता और समरसता को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत तिरंगा फहराया। उन्होंने कहा कि आज जब हम आजादी का पर्व मना रहे हैं, तो हमें देश की अखंडता और संप्रभुता को और अधिक सशक्त करने का संकल्प लेना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने सभी हिमाचल वासियों से आह्वान किया कि वे विभाजन के ऐतिहासिक दर्द से सीख लेते हुए एकजुट होकर देश के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं और विकसित भारत@2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ आगे आएं।



