नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी सुविधा शुरू

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मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को जिला मंडी के नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी सुविधा का शुभारंभ किया। इस विश्वस्तरीय तकनीक को स्थापित करने पर लगभग 28.44 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने मौके पर पहली रोबोटिक सर्जरी की प्रक्रिया भी देखी।

उन्होंने बताया कि इससे पहले अटल सुपरस्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में भी रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की जा चुकी है। आने वाले समय में इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय और शिमला डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में भी यह सुविधा शुरू की जाएगी, जिसकी प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चमियाणा में अब तक 151 और टांडा मेडिकल कॉलेज में 92 ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी से किए जा चुके हैं और इनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में दिल्ली के एम्स स्तर की हाईएंड मेडिकल तकनीक उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है, ताकि ये संस्थान केवल रेफरल केंद्र बनकर न रह जाएं। साथ ही डॉक्टरों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी देने के लिए एक्सपोजर विजिट पर भी भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज नेरचौक में जल्द ही हृदय रोग विभाग स्थापित किया जाएगा और सभी विभागों में पीजी कोर्स शुरू किए जाएंगे। जिन विभागों में प्रोफेसर की कमी है, वहां पीजी कोर्स शुरू करने के लिए सरकार एकमुश्त छूट देगी। इसके अलावा सीनियर रेजिडेंटशिप के पद भी बढ़ाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेरचौक मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी सहित सभी विभागों को सशक्त किया जाएगा और डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ तथा तकनीशियनों के रिक्त पद भरे जाएंगे। ट्रॉमा सेंटर में भी खाली पदों को जल्द भरकर आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाया जाएगा। यहां थ्री-टेस्ला एमआरआई और लिनाक मशीन शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है तथा भविष्य में पैट स्कैन मशीन भी स्थापित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड 40 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये और सुपर स्पेशलिस्ट सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड एक लाख से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये कर दिया है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और स्टाफ से संवाद कर संस्थान की सुविधाओं और कमियों की जानकारी भी ली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सुझावों को नीतियों में शामिल किया जाएगा, ताकि प्रदेश के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।

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