पाषाण अभिलेखों के लिए अब रुख करते प्रदेश की राजधानी अर्थात अपने शिमला की ओर।
हां यही समस्त क्षेत्र कभी घने जंगलों से भरा होता था। जाखू के जंगल में माता श्यामला (काली देवी) मंदिर के नाम से, जाना जाने वाला यह छोटा सा गांव जिसमें केवल तीन चार ही घर हुआ करते थे श्यामला के नाम से ही जाना जाता था। बाद में शिमला कहलाने लगा। कभी इन्हीं जंगलों के मध्य (इस समस्त क्षेत्र) में छोटे छोटे राजाओं,राणों व ठाकुरों की अपनी ठकुराईयाँ हुआ करती थीं। 1806 ईस्वी में नेपाल के गोरखा शासक, भीम सेन थापा द्वारा इधर अपना साम्राज्य स्थापित करने के बाद इन्हें अपने अधीन कर लिया था। बाद में 1814 -1815 ईस्वी (एंग्लो गोरखा युद्ध) में गोरखों को हरा कर ईस्ट इण्डिया कंपनी द्वारा विजय प्राप्त करने के बाद इधर अंग्रेजों का अधिकार हो गया। इसके पश्चात इस क्षेत्र के सुहावने जलवायु और सुंदरता को देखते हुए इसे (शिमला), कलकत्ता के स्थान पर देश की ग्रीष्म कालीन राजधानी बना दिया गया। विकासात्मक कार्यों के साथ सड़कों, पुलों, सुरंगों व भवनों के निर्माण, बाजार दुकाने बनने लगी और साथ ही शिमला को कालका रेल मार्ग से जोड़ दिया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात 1948 में क्षेत्र की पहाड़ी रियासतों का एकीकरण करके हिमाचल का गठन किया गया और इसे प्रदेश की राजधानी बना दिया गया। आज शिमला के दक्षिण पूर्व में उत्तराखंड, उत्तर में मण्डी व कुल्लू, पूर्व में किन्नौर, दक्षिण में सिरमौर व पश्चिम में सोलन लगता है, और सभी जगह से यहां पहुंचना आसान है। यहाँ के ऐतिहासिक व दर्शनीय स्थलों में शामिल हैँ : जाखू मंदिर, काली बाड़ी मंदिर, रिज, मॉल रोड, संकट मोचन मंदिर, तारा देवी मंदिर, समर हिल, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज, राज्य संग्राहलय, नाल देहरा, कुफरी, क्राईस्ट चर्च, टाउन हॉल व गेइटी थियेटर इत्यादि ।
शिमला के पाषाण अभिलेख:
1.हाटकोटी मंदिर अभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : पाषाण।
अभिलेख प्रकार : चट्टान शिला अभिलेख।
अभिलेख काल : 6ठी -9वीं शताब्दी।
अभिलेख लिपि : ब्राह्मी व कुटिल।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : हाटकोटी मंदिर, शिमला रोहड़ू मार्ग, पब्बर नदी के दाएं किनारे।
अभिलेख विवरण : देवी माता हाटकोटी का यह मंदिर जो कि देवी महिषासुर मर्दनी से सम्बंधित है, जिसके साथ में भगवान शिव का मंदिर भी है। दोनों मंदिर शिमला रोहड़ू मार्ग में पब्बर नदी के दाएं किनारे खेतोँ के साथ देखे जा सकते हैँ। यहाँ के अभिलेख जो कि मंदिर परिसर में हैँ, शिलाओं व प्रतिमाओं के समीप देखे गए हैँ और इनकी लिपि ब्राह्मी व कुटिल देखी गई है। उकेरीत अभिलखों से ही, उस समय के शासकों, उनके युद्ध-विजयों, धार्मिक दान पुण्य व निर्माण कार्यों के बारे पता चलता है।
- मशोबरा सीपुर अभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : पाषाण।
अभिलेख प्रकार : शिलालेख।
अभिलेख काल : 3 श. ई.पू।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : गांव सीपुर, मशोबरा शिमला।
अभिलेख विवरण : शिमला के मशोबरा से लगभग दो किलो मीटर नीचे सीपुर गांव में 17 वीं – 18 वीं शताब्दी (नक्काशीदार लकड़ी) के पहाड़ी शैली में बने, शिव मंदिर का निर्माण, कोटी रियासत के राजा गोपी चाँद ने करवया था। इसी मंदिर में प्राचीन शिलालेख देखा जा सकता है जो कि ब्राह्मी लिपि में उकेरा हुआ है। अभिलेख में शासक के निर्देशों का उल्लेख मिलता है।
अभिलेख श्रेणी : पाषाण व काष्ठ।
अभिलेख प्रकार : शिलालेख व काष्ठ अभिलेख।
अभिलेख काल : 10 वीं शताब्दी।
अभिलेख लिपि : शारदा, टांकारी, प्रकृत संस्कृत व पहाड़ी बोली के साथ।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : माता भीमा काली मंदिर सरहान, शिमला।
अभिलेख विवरण : सरहान के देवी माता भीमा काली मंदिर परिसर से मिलने वाले अभिलेख लकड़ी व, शिलाओं दोनों रूपों में (शारदा, टांकारी, प्रकृत लिपियों के साथ) संस्कृत व पहाड़ी बोली में देखे गए हैँ। इन अभिलेखों में राजाओं के निर्देश, धार्मिक सन्देश, देवी माता भीमा काली के प्रति अपनी आस्था, मंदिरों के जीर्णोद्वार, भूमि दान पुण्य कार्यों व विशेष अवसरों पर दिए गए अनुदानों के साथ, सामाजिक सुधारों व पड़ोसी राणों राजाओं के संबंधों की भी जानकारी मिलती है।
- शोली देवता साहिब पलथन अभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : काष्ठ अभिलेख।
अभिलेख प्रकार : शिलालेख।
अभिलेख काल : 17 वीं -18 वीं शताब्दी।
अभिलेख लिपि : टांकारी, बोली पहाड़ी।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : गांव शोली, देवता साहिब पलथन मंदिर, ननखड़ी।
अभिलेख विवरण : लकड़ी के काठ कोणी शैली मे बने देवता साहिब पलथन मंदिर को, शोलेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मन्दिर 17 वीं -18 वीं शताब्दी का बना बताया जाता है। अभिलेख, जो कि टांकारी लिपि में लकड़ी पर उकेरा है, से मन्दिर कब व किस ने बनवाया आदि की जानकारी मिलती है।
5.सराहन छंद अभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : पाषाण।
अभिलेख प्रकार :शिलालेख।
अभिलेख काल : 10 वीं शताब्दी।
अभिलेख लिपि : टांकारी, बोली पहाड़ी।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : भीमकाली मंदिर परिसर, सरहान। अभी यह शिलालेख भूरी सिंह संग्रहालय चम्बा में है।
अभिलेख विवरण : 22 छंदो की कविता वाला यह शिलालेख अब भूरिसिंह संग्रहालय चम्बा है। इसमें राजाओं की प्रशांसा में उनकी विजयों, दान, पुण्य, निर्माण कार्यों व धार्मिक विचारों की चर्चा आदि मिलती है।





