हिमाचल के सरकारी स्कूलों ने रचा सफलता का इतिहास

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हिमाचल प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में चल रहे ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में किए गए सुधारों का प्रभाव इस बार के परीक्षा परिणामों में साफ दिखाई दिया है, जहां सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

इस वर्ष हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं परीक्षा के परिणामों में सरकारी स्कूलों के 50 से अधिक विद्यार्थी टॉप-100 मेरिट सूची में शामिल हुए हैं, यानी आधे से ज्यादा टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। इनमें 48 छात्राएं और 10 छात्र शामिल हैं। यह पिछले वर्षों की तुलना में लगातार बढ़ती हुई उपलब्धि को दर्शाता है—2025 में 50 विद्यार्थी, 2024 में 30 और 2023 में 42 विद्यार्थी टॉप-100 में स्थान बनाने में सफल रहे थे।

सुधारों का असर केवल मेरिट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पास प्रतिशत में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। इस वर्ष सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत बढ़कर 92.02 प्रतिशत पहुंच गया है, जबकि 2025 में यह 88.64, 2024 में 73.76 और 2023 में 79.40 प्रतिशत था।

इस बार 12वीं कक्षा का राज्य टॉपर भी सरकारी स्कूल से ही आया है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भवारना के छात्र अंशित कुमार ने 99.20 प्रतिशत अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि सरकारी स्कूल अब किसी भी स्तर पर निजी संस्थानों से पीछे नहीं हैं। उनकी इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री ने स्वयं फोन कर उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार ने शुरुआत से ही शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को प्राथमिकता दी है, ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे छात्रों की मेहनत, शिक्षकों का समर्पण और अभिभावकों का विश्वास महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने बताया कि सुधारों के चलते हिमाचल प्रदेश शिक्षा गुणवत्ता के क्षेत्र में देश में 5वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पूर्व में यह रैंकिंग 21वें स्थान तक गिर गई थी। आज प्रदेश पूर्ण साक्षर राज्य के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है।

पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए अलग-अलग निदेशालय बनाए गए हैं। शिक्षकों और मेधावी छात्रों को विदेश एक्सपोजर विजिट के माध्यम से वैश्विक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जा रहा है।

इसके अलावा छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए स्मार्ट यूनिफॉर्म चुनने की स्वतंत्रता दी गई है तथा क्लस्टर प्रणाली के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया गया है।

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि बोर्ड में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नई तकनीकों को अपनाकर शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिसके आने वाले समय में और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

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Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

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