सुकेती प्रागैतिहासिक क्षेत्र से प्रसिद्ध हरियाणा और पंजाब का पड़ोसी हिमाचल का जिला सिरमौर ऐतिहासिक अभिलेखों में भी अपना विशेष स्थान रखता है, क्योंकि यहां से टांकरी, शारदा, खरोष्ठी ही नहीं बल्कि ब्राह्मी लिपि के सम्राट अशोक कालीन के अभिलेख भी प्राप्त हो चुके हैं। उन्हीं अभिलेखों के अंतर्गत कुछ ताम्र धातु अभिलेखों का वर्णन आपकी सेवा में प्रस्तुत है:
सिरमौर धातु अभिलेख
1.राजा कर्म प्रकाश ताम्र पट्ट अभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : धातु।
अभिलेख प्रकार : ताम्र धातु पट्ट अभिलेख।
अभिलेख काल : 17वीं शताब्दी।
अभिलेख लिपि : टांकरी।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : नाहन, सिरमौर।
अभिलेख विवरण : सिरमौर नाहन के शासक राजा कर्म प्रकाश द्वारा 1621ईस्वी में नाहन शहर बसा कर इसे सिरमौर की राजधानी बनाया था। राजा कर्म प्रकाश के टांकरी लिपि के इस ताम्र पट्ट अभिलेख से पता चलता है कि उन्होंने धर्म कर्म के कार्यों के अंतर्गत ही ब्राह्मणों व मंदिर को भूमि दान की थी। अभिलेख से यह भी जानकारी मिलती है कि उनके गुरु का नाम बाबा बनवारी दास था जिनके कहने पर ही उन्होंने कई एक मंदिरों का निर्माण करवाया था। राजा कर्म प्रकाश एक कुशल प्रशासक व कला संस्कृति संरक्षक भी थे। राजा द्वारा मुगल बादशाह शाहजहां को 2000 घोड़ों की सहायता देने की जानकारी भी अभिलेख से मिलती है।
2.गुण प्रकाश या सुभांश प्रकाश ताम्र पट्टअभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : धातु।
अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।
अभिलेख काल : 11वीं -12शताब्दी।
अभिलेख लिपि : टांकरी।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : सिरमौरी ताल, सिरमौर।
अभिलेख विवरण : 1195 ईस्वी में जैसलमेर से सिरमौरी ताल पहुंचे, राजा गुण प्रकाश द्वारा अपने राज्य की इधर स्थापना की गई। बाद में उसी ने इस टांकरी में उत्कीर्ण, ताम्र पट्ट अभिलेख को जारी किया गया था। अभिलेख में राज्य स्थापना, भूमि दान, राज्य प्रशासन व्यवस्था व राज्य की सीमा निर्धारण की चर्चा की गई है।
3.राजा किरत प्रकाश बुशहर संधि ताम्र पट्ट अभिलेख।
अभिलेख श्रेणी : धातु।
अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।
अभिलेख काल : 18वीं शताब्दी।
अभिलेख लिपि : टांकरी।
अभिलेख प्राप्ति स्थान : नाहन, सिरमौर।
अभिलेख विवरण : राजा किरत प्रकाश (1754-1770 ईस्वी) के टांकरी के इस ताम्र पट्ट अभिलेख से जहां बुशहर राज्य से वर्षों पुरानी दुश्मनी के अंत की जानकारी मिलती है, वहीं राजा किरत प्रकाश की वीरता, सीमा विस्तार, कुशल प्रशासक व पहाड़ी रियासतों में उसकी धाक की जानकारी भी मिलती है। उसने अपने बाहुबल से गढ़वाल के राजा को हरा कर, नारगढ, राम गढ़, मोरनी, पिंजौर और रामपुर जैसे कई क्षेत्रों पर विजय प्राप्त करके सिरमौर की सीमाओं का विस्तार किया था। उसके द्वारा किए निर्माण कार्य व भूमि दान पुण्य का उल्लेख, अभिलेख में स्पष्ट मिलता है।




