ऐतिहासिक गेयटी थिएटर रविवार को साहित्य, संस्कृति और संवेदनाओं के अद्भुत संगम का साक्षी बना। ‘स्मृतियों का संसार: कला, संस्कृति और साहित्य के जीवन-रंग’ कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार अशोक हंस की चर्चित पुस्तक ‘प्रभु कभी नहीं मरते’ का गरिमामय लोकार्पण किया गया। लेखक ने अपनी इस कृति को अपने प्रिय मित्र एवं दिवंगत कवि स्वर्गीय श्रीनिवास श्रीकांत की स्मृति को समर्पित किया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष तथा भाषा एवं संस्कृति विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. प्रेम शर्मा रहे, जबकि समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री के सचिव तथा शिक्षा, भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव राकेश कंवर (आईएएस) ने की।
इस अवसर पर स्वर्गीय श्रीनिवास श्रीकांत के सुपुत्र विनय कांत तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), नई दिल्ली के पूर्व निदेशक एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज के पूर्व निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
पुस्तक लोकार्पण के उपरांत आयोजित परिचर्चा में वरिष्ठ साहित्यकार सुदर्शन वशिष्ठ, अच्छर सिंह परमार, विजय पुरी, प्रवीण चांदला, देवेंद्र गुप्ता तथा के. आर. भारती ने पुस्तक के विभिन्न साहित्यिक पक्षों पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि ‘प्रभु कभी नहीं मरते’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि स्मृतियों, मानवीय संवेदनाओं और साहित्यिक मूल्यों का जीवंत एवं सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने लेखक अशोक हंस के साहित्यिक अवदान की सराहना करते हुए पुस्तक की विषयवस्तु, भाषा-शैली और भाव-संवेदना को विशेष रूप से रेखांकित किया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन इंदिरा आलोक ने किया। समारोह के अंत में हंस परिवार की ओर से उपस्थित सभी साहित्यकारों, विद्वानों, अतिथियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों का कार्यक्रम में सहभागिता एवं स्नेहपूर्ण उपस्थिति के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।



